मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ओमप्रकाश राजभर को मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया

लखनऊ,लोकसभा चुनाव के मतदान समाप्त होने के दूसरे ही दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के मुखिया और प्रदेश सरकार में मंत्री पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं विकलांग जन विकास ओम प्रकाश राजभर को मंत्रिमण्डल से बर्खास्त करने की सिफारिश के बाद राज्यपाल से की। जिसके बाद राज्यपाल ने भी बिना देर किए उन्हें पदमुक्त कर दिया।
सरकारी प्रवक्ता ने सोमवार को यहां बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ओमप्रकाश राजभर को बर्खास्त करने की सिफारिश की थी जिसे राज्यपाल राम नाइक ने तुरंत मान लिया और उन्हें प्रदेश मंत्रिमण्डल की सदस्यता से पदमुक्त कर दिया है। इसके अलावा सुहेलदेव राजभर पार्टी के अन्य सदस्य जो राज्य मंत्री का दर्जा रखते है उन्हें भी तत्काल प्रभाव से पदमुक्त कर दिया गया है। मुख्यमंत्री की सिफारिश के आधे घंटे के बाद राज्यपाल कार्यालय से जारी बयान के अनुसार उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने मंत्रिमण्डल के सदस्य ओम प्रकाश राजभर, मंत्री पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं विकलांग जन विकास को तात्कालिक प्रभाव से प्रदेश मंत्रिमण्डल की सदस्यता से पदमुक्त कर दिया है।
उधर, बर्खास्तगी के बाद सुभासपा नेता राजभर ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि हम फैसले का स्वागत करते है, मुख्यमंत्री ने फैसला देर में लिया है, फैसला बीस दिन पहले ले लिये होते तो और अच्छा होता। उन्होंने आज यह साबित कर दिया है कि जो गरीबो की लड़ाई राजभर लड़ रहे है उस लड़ाई को वह (मुख्यमंत्री) नही मानते। उन्होंने कहा कि गरीबों के साथ अन्याय हो रहा है।
गौरतलब है कि काफी समय से राजभर अपने विवादस्पद बयानों और हरकतों को लेकर योगी सरकार के लिए लगातार मुसीबत बने हुए थे। मुख्यमंत्री कार्यालय की तरफ से सोमवार को सुबह ट्वीट कर इसकी आधिकारिक जानकारी दी गई। सीएम ऑफिस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया गया कि आज सीएम योगी आदित्यनाथ ने महामहिम राज्यपाल को पिछड़ा वर्ग कल्याण और दिव्यांग जन कल्याण मंत्री ओमप्रकाश राजभर को मंत्रिमंडल से तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने की सिफारिश की। राजभर अक्सर भाजपा के खिलाफ विवादास्पद बयान देते रहे हैं। अभी हाल ही में उन्होंने लोकसभा चुनाव में राजभर ने भाजपा के खिलाफ कड़ी बयानबाजी की थी। दरअसल ओम प्रकाश राजभर भाजपा के सत्ता संभालने के बाद से ही उनके लिए मुसीबत बने हुए हैं। कभी अफसरों द्वारा सिफारिशें न सुनने पर उन्होंने हंगामा किया तो कभी बेटों को पद दिलाने के लिए इस्तीफा देने पर अड़े। भाजपा सरकार लगातार उनके बयानों और इस्तीफों को नजरअंदाज करती रही। उप्र में राज्यसभा चुनावों को लेकर होने वाले मतदान और लोकसभा चुनावों से पहले बीजेपी के शीर्षस्थ नेताओं की तरफ से ओम प्रकाश राजभर को समझाने और मनाने का दौर चला। लेकिन वह नही माने और लोकसभा चुनाव में राजभर की पार्टी ने बीजेपी के खिलाफ 39 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने की घोषणा कर दी थी।
राजभर ने हाल ही मेें मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मंत्रिपरिषद से इस्तीफा देने की बात कही थी। उन्होंने यह भी कहा था कि उन्होंने तो पहले ही इस्तीफा दे दिया था लेकिन मुख्यमंत्री ने उनका इस्तीफा स्वीकार नही किया था। इस्तीफे के बाद सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने योगी सरकार द्वारा मंत्रिमंडल से बर्खास्तगी के निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि भाजपा से लोकसभा चुनाव को लेकर 13 अप्रैल को गठबंधन न होने पर अपना इस्तीफा सौंप चुके हैं। उन्हें मंत्री पद से हटाये जाने पर कोई शिकवा व शिकायत नही है। राजभर ने कहा कि हम मात्र एक ही सीट लोकसभा चुनाव में मांग रहे थे, हम एक पार्टी है, अगर हम चुनाव नही लड़ंगेे तो क्या जवाब अपनी जनता को देंगे। अब हम अकेले चलेंगे और अपनी पार्टी की बात जनता तक पहुंचायेंगे। उन्होंने कहा कि पिछड़े वर्ग के हित की लड़ाई लड़ी तथा यह लड़ाई लड़ते रहेंगे, योगी सरकार को सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट को लागू करने की फुर्सत नही मिली। उन्होंने कहा कि वह अपनी ताकत का उपयोग पिछड़े वर्ग को जागृत करने व पार्टी संगठन को मजबूत करने पर लगायेंगे।
वहीं दूसरी ओर राजभर की बर्खास्तगी के बाद भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय ने कहा है कि भाजपा गठबंधन धर्म निभाने व अपने सहयोगियों का पूरा सम्मान एवं भागेदारी करने वाला दल है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रदेश में हमारे गठबंधन सहयोगी रहे ओमप्रकाश राजभर ने हर कदम पर गठबंधन धर्म की मर्यादा का न केवल उल्लंघन किया बल्कि उसे तार-तार भी किया। इसलिए पार्टी और सरकार के मुखिया योगी आदित्यनाथ दोनों को ही सख्त निर्णय लेने पर विवश होना पड़ा है।

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