नई दिल्ली, बच्चे का शिक्षित होना जितना जरुरी है उतना ही उसे शिक्षक का आदर करना भी आना चाहिए, क्योंकि शिक्षक ही बच्चे की दिशा निश्चित करते हैं। उसे सही गलत का फर्क करना सिखाते हैं। जहाँ पर बच्चा गलत रास्ते पर जाता है। शिक्षक ही उसे सही राह दिखता है। शिक्षक वर्तमान शिक्षा प्रणाली का आधार स्तम्भ माना जाता है। शिक्षक ही बच्चे को उच्च शिक्षा व आचरण द्वारा श्रेष्ठ, प्रबुद्ध व आदर्श व्यक्तित्व प्रदान करते हैं।
भारतीय शिक्षा का एक मात्र उदेश्य मनुष्य को पूर्ण ज्ञान प्राप्त कराना था जिससे वह अंधकार से निकल कर ज्ञान के प्रकाश में विचरण करता था। भारतवर्ष समस्त विश्व में ज्ञान का वितरण करता था, जिसके बल पर विश्व गुरु की संज्ञा से अभिहीत हुआ।
अध्यापक वही महत्वपूर्ण होता है जो अपने गरिमापूर्ण चरित द्वारा अपने विद्यार्थी वर्ग को अनुकूल तथा सकारात्मक दिशा में प्रभावित करने में सफल हो सके। देश को सक्षम बनाने में माता-पिता और शिक्षक की भूमिका अग्रणी होती है।
प्रत्येक बच्चे को अपने गुरु की इज़्ज़त करनी चाहिए। माता भी अपने बच्चे की प्रथम शिक्षिका होती हैं, अतः प्रत्येक ज्ञान देने वाले का आदर करना हर बच्चे का कर्तव्य है।
बच्चा भी अपने शिक्षक की हर बात मानता है, इसलिए यदि आपका बच्चा किसी बात को मानने में आना-कानी करता है तो उस बात को समझाने की ज़िम्मे दारी उसके शिक्षक को दे दें, वे आसानी से आपके बच्चे को समझा देंगे। खास कर छोटे बच्चे अपने टीचर की हर बात का अनुकरण करते हैं। हमें अपने बच्चे को एक सैनिक की तरह बनाना है, जो की हर परिस्थितयो का सामना कर सके और यह एक शिक्षक के माध्यम से ही संभव है।
बच्चों को शिक्षक का सम्मान करना आना चाहिए