सपा-बसपा का यूपी में गठबंधन, कांग्रेस ने अकेले रण में उतरने का बनाया मन

लखनऊ,लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा को साफ करने के मनसूबे लेकर तैयार हो रहे महागठबंधन को करारा झटका लगा है। राजनीति के गढ़ कहे जाने वाले उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाजवादी पार्टी (बसपा) ने मिलकर लोकसभा चुनाव लडऩे गठबंधन कर लिया है। ऐसे में कांगे्रस अकेले ही चुनाव लड़ेगी।
सपा और बसपा के बीच गठबंधन पर बात बन गई है और अब दोनों ही साथ मिलकर चुनावी मैदान में ताल ठोंकेंगे। हालांकि ‘खिचड़ी के पक जाने के बाद कांग्रेस को एक बड़ा झटका भी लगा है, क्योंकि सपा और बसपा ने कांग्रेस को साथ नहीं लेने का भी निर्णय लिया है।
सीटों का बंटवारा 15 को
वहीं, राष्ट्रीय लोकदल और अन्य छोटे दलों के लिए सीटें छोड़कर उन्हें भी साधने की कवायद पर दोनों के बीच सहमति बनी है। सीटों के बंटवारे पर अंतिम फैसला 15 जनवरी के बाद लिए जाने की संभावना है। सपा और बसपा के गठबंधन पर शुक्रवार को बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बीच करीब चार घंटे मैराथन बैठक हुई। सूत्रों के मुताबिक, सपा और बसपा उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 37-37 सीटों पर चुनाव लड़ सकते हैं। वहीं, अजीत सिंह के राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) को तीन सीटें दी जा सकती हैं। बाकी छह सीटें सहयोगी दलों को दी जाएंगी। राजनीतिक पंडितों की मानें तो अगर अन्य विपक्षी दल भी साथ आते हैं तो 2014 की स्थिति के हिसाब से भाजपा को 53 सीटों का नुकसान हो सकता है।
कांग्रेस कर रही तैयारी
कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के इशारे पर प्रदेश के संगठन प्रभारी सतीश अजमानी से यूपी के सभी जिला और नगर अध्यक्षों से उनकी कार्यकारिणी के पदाधिकारियों के साथ ब्लॉक और वॉर्ड स्तर की कमेटी और बूथ स्तर तक की कमेटी की जानकारी मांगी है। तीन प्रोफार्मा में कमेटी के पदाधिकारियों के पद सहित नाम और मोबाइल नंबर भर कर उन्हें 10 जनवरी तक पीसीसी को ईमेल पर भेजना है।
अनुप्रिया और राजभर के साथ उतरेगी भाजपा
दोनों की नाराजगी दूर करने में जुटे भाजपा के वरिष्ठ नेता
भाजपा अनुप्रिया पटेल के नेतृत्व वाले अपना दल और ओम प्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) सरीखे पुराने साथियों के साथ गठबंधन में ही लोकसभा चुनाव लड़ेगी। पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व के निर्देश पर दोनों दलों से पार्टी के बड़े मंत्री और पदाधिकारी बात कर उनकी नाराजगी दूर करने की कोशिश में जुटे हैं। पार्टी सूत्रों ने दावा किया कि राजभर के विरोध की वजह बनी सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट को भी लोकसभा चुनाव से पहले प्रदेश सरकार लागू कर सकती है। अनुप्रिया से पार्टी के महासचिव व सांसद डॉ. अनिल जैन बात कर रहे हैं, जबकि राजभर से सरकार के एक बड़े मंत्री को समझाने के लिए लगाया गया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, दोनों दल अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों की खातिर भाजपा पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह अनुप्रिया और राजभर दोनों से लगातार संपर्क में हैं। शाह से मिलने के बाद ही राजभर पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मिले थे। मुख्यमंत्री ने उनके शिकवे भी सुने और उनके समाधान का भी वादा किया था।

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