बिहार में कांग्रेस तारिक अनवर को बना सकती है अपना चेहरा

नई दिल्ली,कभी सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मु्द्दे पर 1999 में कांग्रेस से बागवात कर शरद पवार के साथ मिलकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) का गठन करने वाले तारिक अनवर ने पार्टी को अलविदा कह दिया है। इतना ही नहीं उन्होंने लोकसभा सदस्य पद से भी इस्तीफा दे दिया है। तारिक के इस्तीफे के बाद माना जा रहा है कि एक बार फिर कांग्रेस में वापसी कर सकते हैं। सूत्रों की मानें तो तारिक अनवर कांग्रेस में अपना भविष्य देख रहे हैं। आने वाले लोकसभा चुनाव में तारिक अनवर कांग्रेस का चेहरा हो सकते है। सूत्रों की माने तो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से तारिक अनवर से करीब अब साफ नजर आने वाले है।
एनसीपी छोड़ने का राफेल बना बहाना
कांग्रेस के पास बिहार में कोई बड़ा चेहरा नहीं है, इस कारण राफेल मुद्दे पर शरद पवार के बयान से तारिक अनवर को पार्टी छोड़ने का आधार मिल गया है। तारिक अनवर ने कहा,शरद पवार का राफेल पर दिया गया बयान मुझे ठीक नहीं लगा। एनसीपी की तरफ से जो सफाई दी गई वो सही नहीं थी। पवार ने जब बयान दिया था तो खुद उन्हें सफाई देनी चाहिए थी। हालांकि उनकी तरफ से खुद कोई सफाई नहीं आई तो मैंने इस्तीफा दे दिया।
घर वापसी के पीछे छिपी है सियासत
एनसीपी छोड़ने के बाद किस पार्टी में जाएंगे इस सवाल पर तारिक अनवर ने कहा कि ये अभी तय नहीं है। समर्थकों से बात करने के बाद तय करूंगा। हालांकि हमारे सूत्रों के मुताबिक वे कांग्रेस में जाने का मन बना चुके हैं और आने वाले 8 से 10 दिनों में कांग्रेस जॉइन कर सकते हैं। बिहार में कांग्रेस अपने आधार को मजबूत करने की कोशिश में जुटी है, लेकिन पार्टी के पास राज्य में कोई बड़ा चेहरा नहीं है। इसकारण तारिक अनवर को अपना राजनीतिक भविष्य कांग्रेस में सेफ नजर आ रहा है। वो ‘घर वापसी’ कर बिहार में कांग्रेस का बड़ा चेहरा बनना चाहते हैं। एनसीपी छोड़ने का निर्णय उन्होंने बहुत पहले से ही कर लिया था, एनसीपी में उनके और पार्टी के नेता प्रफुल्ल पटेल के बीच रिश्ते बेहतर नहीं रहे हैं। 2014 के चुनाव के बाद से दोनों नेताओं के बीच कई बार पार्टी की बैठकों में अलग-अलग विचार रहते थे।
इसतरह आए राहुल गांधी के करीब
कांग्रेस में राहुल गांधी के कद बढ़ने के बाद से ही तारिक अनवर ‘घर वापसी’ करने के जुगत में थे। तारिक अनवर कांग्रेस में वापसी की राह 2016 से ही तलाश रहे थे। नोटबंदी के बाद राहुल गांधी ने जब पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस करने उतरे थे, तब तारिक अनवर देर से पहुंचे थे। इसके बाद राहुल ने अपने बगल में बैठे ज्योतिरादित्य सिंधिया से तारिक अनवर के लिए सीट छोड़ने को कहा था। इस घटना के बाद से राहुल से उनकी नजदीकियां बढ़ीं। पिछले दो सालों से तारिक अनवर के उर्दू अखबार में छपने वाले लेखों में वह कांग्रेस को लेकर काफी नरम थे। इतना ही नहीं वो राहुल गांधी की कार्यशैली की तारीफ भी करते रहे हैं। तारिक अनवर ने बताया था कि दो महीने पहले ही 2019 में विपक्षी की ओर से राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद का चेहरा बताया था। जबकि शरद पवार ने कहा था कि अभी विपक्ष का चेहरा तय नहीं है।
सोनिया के चलते की थी कांग्रेस से बगावत
1999 में कांग्रेस की कमान जब सोनिया गांधी ने संभाली तो शरद पवार, तारिक अनवर और पीए संगमा ने पार्टी से बगवात कर दी थी। इन तीनों नेताओं ने सोनिया गांधी के विदेश मूल को मुद्दा बनाया था। इसके बाद तीनों नेताओं ने मिलकर एनसीपी का गठन किया था। हालांकि, बाद में यूपीए की जब केंद्र में सरकार बनी तो एनसीपी कांग्रेस के साथ आ गई थी।

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