छिंदवाड़ा,आदिवासी विकास विभाग के दफ्तर में बाबू बनकर बैठे शिक्षकों को वापस स्कूल भेजा जाएगा। विभाग के आयुक्त ने आदेश जारी कर सभी अटेचमेंट समाप्त कर शिक्षकों को उनकी मूल शाला में वापस भेजने का फरमान जारी कर दिया है। खास बात यह है कि बार-बार अटेचमेंट समाप्त करने के आदेश आ रहे है। लेकिन विभाग के ही अधिकारियों की मनमानी के कारण अटेचमेंट समाप्त होने का नाम नही ले रहे है। विभाग के जिला मुख्यालय सहित ब्लॉकों के दफ्तरों में लगभग 40 शिक्षक ऐसे है जो दफ्तरों में अटैच है जो शिक्षक की जगह बाबूगिरी का काम कर रहे है। इन शिक्षकों का पहले भी अटैचमेंट समाप्त करने के आदेश जारी करने सूची बनाई गई थी लेकिन सूची बनाने के बाद विभाग से कोई आदेश ही नही निकले जिसका परिणाम यह रहा कि शिक्षा सत्र शुरू हुए ढाई महीने का समय बीत जाने के बाद बावजूद भी हालात जस-तस है। इस मामले को लेकर विभाग के मंत्री ने भी पिछले दिनों छिंदवाड़ा प्रवास पर बैठक लेकर सहायक आयुक्त को ना केवल तबादले की सूची बल्कि अटैचमेंट समाप्त करने के आदेश दिए थे लेकिन विभाग इस मामले को लेकर कल भी कटघरे में था और आज भी है। आखिर यहां कर्मचारियों से जुड़े मामलों की सुनवाई क्यों नही होती है। विभाग के स्कूलों, आश्रमों और छात्रावासों में लंबे समय से शिक्षक, अधीक्षक मठाधीश बने बैठे है और उन्हें इधर से उधर करने वाला भी कोई नही उम्मीद थी कि पिछले जून माह में विभाग जिला तबादल बोर्ड के समक्ष अपने विभाग के स्थानांतरण के मामले रखेगा लेकिन विभाग ने एक भी मामला बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत नही किया है। आदिवासी विकास विभाग मुख्य रूप से छिंदवाड़ा, बिछुआ,सौंसर, परासिया, जुन्नारदेव, तामिया, हर्रई, अमरवाड़ा के शहरी और ग्रामीण अंचलों में लगभग 110 स्कूलों आश्रमों और छात्रावासों का संचालन करता है।
महंगा पड़ेगा दफ्तरों में अटेचमेंट,बाबू बने शिक्षकों को भेजा जाएगा स्कूल