अशोकनगर,जिला चिकित्सालय में उपलब्ध होने वाले शव वाहन का लाभ मृतक परिजनों को नहीं मिल पा रहा है। लाखों रुपये की लागत से खरीदे गए शव वाहनों का उपयोग आखिर कहां हो रहा है? इस संबंध में कोई जानकारी किसी को नहीं है। जिन लोगों की सुविधा के लिए पैसे खर्च कर यह वाहन खरीदे गए उन तक इन वाहनों की सुविधा नहीं पहुंच पा रही है।
ताजा मामला जिला चिकित्सालय का है, जहां शहर की त्रिलोकपुरी कालोनी में निवासरत 9 वर्षीय बालिका की मौत के बाद दिखाई दिया। त्रिलोकपुरी कालोनी निवासी मोनिका पुत्री प्रताप अहिरवार बीते तीन दिनों से उल्टी-दस्त से पीढि़त अवस्था में जिला चिकित्सालय में उपचार के लिए भर्ती थी। बुधवार की दोपहर को बालिका के स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद डॉक्टरों ने उसकी छुट्टी कर दी। जिसके बाद परिजन उसे घर लेकर आ गए थे। लेकिन शाम के समय अचानक मोनिका की तबीयत फिर से खराब हो जाने से उसे पुन: जिला चिकित्सालय लाया गया। जहां डॉक्टरों ने मोनिका को बाहर उपचार हेतु ले जाने को वोला। लेकिन कोई साधन उपलब्ध न हो पाने से परिजन बच्ची को बाहर उपचार के लिए नहीं ले जा सके और मोनिका की मौत हो गई। जिसके बाद मृतक बच्ची के शव को घर तक ले जाने के लिए परिजन जिला चिकित्सालय में शव वाहन के लिए इधर-उधर भटकते रहे लेकिन वाहन की सुविधा नहीं मिल सकी। बच्ची के मामा विक्रम अहिरवार ने बताया कि उन्होने डॉक्टरों से भी वाहन के लिए बात की, लेकिन उन्होंने कहा कि शव वाहन नगरपालिका के सुप्रद हैं और शाम सात बजे के बाद वाहन उपलब्ध नहीं होते। काफी देर प्रयास करने के बाद जब शव वाहन मिलने की उम्मीद नहीं दिखी तो बच्ची के मामा ने भांजी के शव का मोटरसाइकिल पर बैठकर गोद में रखा और घर ले गए। वे दुखी हृदय और व्यथित मन से बाइक पर ही बच्ची के शव को घर तक लेकर गए।
शव वाहन नहीं मिला, मोटर साइकल पर रखकर ले गए बच्ची का शव