तीन लाख शिक्षक दे रहे अन्य विभागों में सेवा,सरकारी स्कूलों में शिक्षण कार्य हो रहा प्रभावित

भोपाल,प्रदेश में 1 लाख 42 हजार 512 प्राथमिक व माध्यमिक सरकारी स्कूल हैं। जिसमें 30 हजार शिक्षकों के पद खाली है, जबकि 2 लाख 86 हजार शिक्षक तो है, लेकिन वे किसी शिक्षण कार्य छोड़कर अन्य विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। जिससे सरकारी स्कूलों में शिक्षक पढ़ाने ही नहीं आते हैं। सरकारी स्कूलों में छात्रों को मुफ्त किताब, यूनिफार्म व भोजन मिलने के बावजूद भी सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या लगातार घट रही है। इसका सबसे बड़ा कारण निजी स्कूलों में अंग्रेजी पढ़ाने की चाहत अभिभावक सरकारी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने से कतरा रहे हैं। साथ ही सरकारी स्कूल में पढ़ाई के लिए अनुकूल वातावरण नहीं मिल रहा है। कुछ स्कूलों के भवन नहीं हैं तों कुछ में पढ़ाने के लिए शिक्षक। प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल की हालत बहुत खराब है। सरकारी स्कूल में मूलभूत सुविधा नहीं मिलने के कारण छात्र और पालकों का रूख प्रायवेट स्कूलों की तरफ बढ़ रहा है। अगर पांच साल के आंकड़ों पर नजर डाले तो हर साल पहली से आठवीं कक्षा में लगभग 3 से 4 लाख छात्रों की संख्या घट रही है। जिसका फायदा प्रायवेट स्कूलों को मिल रहा है।
शासन की ओर से 2014 में अंग्रेजी को बढ़ावा देने के लिए हर ब्लॉक में एक-एक सरकारी अंग्रेजी स्कूल खोलने के निर्देश दिए गए। जिसके लिए कई ब्लॉक में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर स्कूल शुरू किया गया, लेकिन इसका क्रियान्वयन ठीक से नहीं होने के कारण बच्चों की संख्या बढ़ नहीं पा रही है। इसका सबसे बड़ा कारण सरकारी स्कूलों में अंग्रेजी के शिक्षकों की कमी बताई जा रही है। सरकारी स्कूलों में छात्रों की घटती संख्या का फायदा सीधे-सीधे प्रायवेट स्कूलों को मिल रहा है। सरकारी स्कूल में पढ़ाई के लिए अनुकूल वातावरण नहीं होने के कारण पालक अपने बच्चों को प्रायवेट स्कूल में एडमिशन दिला रहे हैं। प्रायवेट स्कूल संचालक ने केवल फीस में पालकों को लूटते हैं, बल्कि किताब, ड्रेस, वाहन आदि के नाम पर भी पालकों से मनमानी राशि वसूल करते हैं। इय बारे में स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री दीपक जोशी का कहना है कि अभी हायर व हाई स्कूलों में छात्रों की संख्या एक-दो सालों में बढ़ी है। प्राथमिक व माध्यमिक स्कूलों में भी सुविधाओं को बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। साथ ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का प्रयास किया जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *