नई दिल्ली,बलात्कार के मामलों में एक तरफ जहां क्रिमिनल लॉ (अमेंडमेंट) आर्डिनेंस, 2018 में सख्त सज़ा देने का प्रावधान किया गया है, तो वहीं दूसरी तरफ केन्द्र सरकार रेप केस में निश्चित समय सीमा के भीतर जांच, ट्रायल और अपील चाहती है, ताकि इंसाफ जल्द दिया जा सके। केन्द्रीय मंत्रिमंडल की तरफ से जारी अध्यादेश के मुताबिक, सभी रेप केसों की जांच दो महीने के भीतर अनिवार्य तौर पर पूरी करनी होगी।
यह समय सभी रेप केस के ट्रायल पर भी लागू होगा और छह महीने में अपील का निपटारा किया जाएगा। इस वक्त रेप केसों में जांच और ट्रायल की कोई निश्चित समय-सीमा नहीं है। इसके चलते ये मामले कई वर्षों तक चलते रहते हैं। इसके अलावा, अगर दो महीने के दौरान जांच पूरी नहीं होती है, तो अभियुक्त जमानत का हकदार भी हो जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में तेज़ी लाने के लिए सरकार की योजना रेप केस की जांच में लगे लोगों को बढ़ाने की है। सभी राज्यों को फॉरेंसिक लैब दी जाएगी, ताकि रेप केस में साक्ष्यों का पता लगाया जा सके। इसके अलावा, रेप केस के लिए सभी थानों और अस्पतालों में स्पेशल फॉरेंसिक किट दी जाएगी। सरकार की योजना राज्य, यूनियन टेरिटरी और हाइकोर्ट से मशविरा लेकर नए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की है। इसके साथ ही, पब्लिक प्रॉसिक्यूटर का नया पोस्ट बनाने और संबंधित इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की भी है।
नए अध्यादेश के बाद रेप केस की जांच और ट्रायल दो महीने के भीतर करना होगा पूरा