ग्वालियर,ग्वालियर किला की तराई में मोहम्मद गौस के मकबरे तथा अन्य स्मारकों के आस-पास अतिक्रमण हटाये जाने संबंधी याचिका पर उच्च न्यायालय की ग्वालियर खण्डपीठ ने राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण को (एनएमए) सभी पहलु पर जाँच कर अपनी रिपोर्ट 6 माह में प्रस्तुत करने को कहा है।
निर्देश के अनुसार प्राधिकरण द्वारा ग्वालियर में सर्किट सिटिंग कर सभी पक्षों को सुना जायेगा। संबंधित क्षेत्र में “प्रतिबंधित क्षेत्र” और “विनियमित क्षेत्र” में प्राधिकरण द्वारा उन अतिक्रमणों को चिन्हित किया जायेगा जो एंशियंट मॉन्यूमेन्ट्स एण्ड आर्कियालॉजिकल साइट एण्ड रिमेन्स एक्ट 1958 तथा उसके अन्तर्गत बने नियमों के प्रावधानों के अनुसार अतिक्रमण की श्रेणी में आते हैं। प्राधिकरण द्वारा इस प्रकार के अतिक्रमणकारियों को नोटिस भेजकर उन्हें सुनवाई तथा अपना पक्ष प्रस्तुत करने का पूरा अवसर दिया जायेगा। प्राधिकरण को समय-सीमा आगे बढ़ाने का अनुरोध करने की भी छूट दी गई है।
अंतरित राहत के रूप में खण्डपीठ ने निर्देश दिये हैं कि कथित “प्रतिबंधित क्षेत्र” और “विनियमित क्षेत्र” में अगले आदेश तक कोई तोड़-फोड़ या निर्माण कार्य नहीं किये जाये।
प्राधिकरण द्वारा यह भी सुनिश्चित किया जायेगा कि क्या मोहम्मद गौस मकबरा स्मारक के “प्रतिबंधित क्षेत्र” की परिधि का सही-सही सीमांकन अधिनियम के अनुसार हुआ है या नहीं। इसका माप कर पुन: तस्दीक की जायेगी। माप के बाद “प्रतिबंधित क्षेत्र” और “विनियामक क्षेत्र” की भूमि का सीमांकन करने को कहा गया है। यह सारा कार्य भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के सबसे वरिष्ठ अधिकारी द्वारा किया जायेगा।
यह भी देखा जायेगा कि “प्रतिबंधित क्षेत्र” और “विनियमित क्षेत्र” की क्रमश: 100 मीटर और 200 मीटर की परिधि का निर्धारण अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार सही है कि नहीं।
ग्वालियर किले के आस-पास के अतिक्रमण पर 6 माह में राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण से रिपोर्ट मांगी