शिवराज कैबिनेट ने 6 हजार से ज्यादा अवैध कॉलोनियों को वैध किया

भोपाल,मध्य प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव से पहले शिवराज सरकार बड़ा फैसला किया है। शिवराज कैबिनेट की बुधवार को बैठक में 6 हजार से ज्यादा अवैध कॉलोनियों को नियमित करने प्रस्तावित बिल को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अवैध निर्माण की कंपाउंडिंग करने की सीलिंग एफएआर का 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति प्रदान कर दी है। सरकार अब विधयेक को अध्यादेश के माध्यम से लागू करेगी। इसके बाद िनयम बनाए जाएंगे। जिसमें अवैध कॉलोनी की कट ऑफ डेट, नियमित योग्य कॉलोनी में इन्फ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट के लिए कॉलोनाइजर और रहवासियों से कितनी राशि ली जाएगी।
कैबिनेट में हुए इस निर्णय के बारे में चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने बताया बिना अनुमित निर्माण करने पर कालोनाइजर अथवा बिल्डर के खिलाफ 7 साल तक की सजा और 10 लाख रूपए का जुर्माना होगा। ऐसे प्रावधान नियमों में किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि सरकार ने यह एतिहासिक फैसला लिया है।
दरअसल, अवैध कॉलोनियों को वैध करने में कई अड़चने हैं। इसलिए नगरीय प्रशासन ने पेंडिंग नियमों को मोडिफाई कर नए एक्ट के ड्राफ्ट को मंत्रालय भेजा था। इससे पहले भी नियमों में परिवर्तन कर राज्य सरकार ने कुछ कॉलोनियों को वैध करार दिया था। लेकिन ग्वालियर हाईकोर्ट ने उस पर रोक लगा दी थी। प्रदेश में करीब 6876 अवैध कॉलोनियां हैं। ग्वालियर, जबलपुर, भोपाल और इंदौर में सबसे ज्यादा कॉलोनियां हैं। शिवराज सरकार अगर निकाय चुनाव से पहले इन्हें नियमित कर देती है तो यह भाजपा के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है। हालांकि शिवराज सिंह चौहान ने 2018 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी यह घोषणा की थी, लेकिन सत्ता में वापस नहीं लौट पाए थे और कांग्रेस की सरकार में यह ठंडे बस्ते में चला गया था।
नक्शें स्वीकृत होंगे, बैंक से लोन मिल सकेगा
अवैध कॉलानियों को नियमित करने का संशोधित कानून लागू होने के बाद निर्मित मकानों के नक्शें स्वीकृत होंगे। इसके साथ ही कॉलोनी नियम होने के बाद लोग निर्माण के लिए बैंक से लोन भी ले सकेंगे। इन कॉलोनियों में कई प्लाट अभी भी खाली पड़े हैं, क्योंकि नक्श स्वीकृत नहीं होने के कारण बैंक से लोन नहीं मिल पाया था।
दिग्विजय सरकार ने लिया था वैध करने का फैसला
प्रदेश में 3 फरवरी 2000 को सरकार ने शहरी क्षेत्र में नजूल की जमीनों को (अर्बन सीलिंग) शहरी क्षेत्र घोषित कर दिया था। इसके बाद इन पर अवैध रूप से कॉलोनियों और मकानों का निर्माण होता रहा, लेकिन उन्हें वैध करने के कोई नियम नहीं थे। वर्ष 4 मई 2002 को इस बारे में तत्कालीन दिग्विजय सरकार ने इन कॉलोनियों को वैध करने का निर्णय तो लिया, लेकिन इसका पालन नहीं हो पाया। इसी के क्रियान्वयन के लिए कैबिनेट ने प्रस्ताव को मंजूरी दी।
ये प्रावधान भी होंगे
– पहले अवैध कॉलोनी निर्माण के दौरान रहवासी को भी अभियुक्त बनाया जाता था, लेकिन नए कानून में सिर्फ कॉलोनाइजर के खिलाफ कार्रवाई होगी।
– बिना अनुमित निर्माण करने पर कालोनाइजर अथवा बिल्डर के खिलाफ 7 साल तक की सजा और 10 लाख रूपए का जुर्माना होगा।
– यदि बिल्डर ने यह राशि नहीं चुकाई तो बैंक गारंटी या फिर संपत्ति कुर्क की जाएगी।
– नगर निगम के अफसरों की जवाबदेही भी तय की गई है। यदि अवैध निर्माण होता है तो संबंधित अफसर व कर्मचारी के खिलाफ भी कार्यवाही होगी।

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