जबलपुर, एमपी हाईकोर्ट से प्रदेश की भाजपा सरकार को बड़ी राहत मिली है। कांग्रेस से बीजेपी में आए विधायकों के मंत्री बनाए जाने पर दायर की गई जनहित याचिका हाईकोर्ट ने आज सुनवाई के बाद खारिज कर दी। कोर्ट की तरफ से टिप्पणी की गई कि वर्तमान में सभी विधायक पुन: चुनाव लड़ चुके हैं। इसमें से कई मंत्री पद पर हैं। ऐेसे में अब इस याचिका पर सुनवाई का कोई औचित्य नहीं है।
-14 मंत्रियों के निलंबन की मांग की गई थी
जानकारी के अनुसार छिंदवाड़ा की अधिवक्ता आराधना भार्गव ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि मार्च में मध्य प्रदेश में इस्तीफा देने वाले कांग्रेस के 14 विधायकों को मंत्री बनाया गया है, जो कि असंवैधानिक है। उन्होंने इसे आर्टिकल 164 (4) का उल्लंघन बताते हुए प्रक्रिया को अनुचित बताया था। याचिका में सभी 14 मंत्रियों के निलंबन की मांग की गई थी। पूर्व में हाईकोर्ट ने सीएम सहित 19 लोगों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
चुनाव जीतकर मंत्री बन चुके हैं
याचिकाकर्ता आराधना भार्गव की तरफ से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पक्ष रखा। वहीं सरकार की ओर से अधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने पक्ष रखा। ये याचिका उपचुनाव से पहले के परिप्रेक्ष्य में लगाई गई थी। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक और जस्टिस वीके शुक्ला की डबल बेंच में मामले की सुनवाई हुई। याचिका में दल-बदल कर विधायक पद छोडऩे के बावजूद मंत्री बनाए जाने की प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने इस पर कहा कि वर्तमान में उपचुनाव हो चुका है। संबंधित सभी विधायक पुन: चुनाव लड़ कर जीत चुके हैं और मंत्री हैं। ऐसे में अब याचिका पर सुनवाई औचित्यहीन है।
-कांग्रेस के मंसूबे को लगा झटका
हाईकोर्ट के इस निर्णय से जहां सरकार को बड़ी राहत मिली है। वहीं कांग्रेस के मंसूबे को बड़ा झटका लगा है। अभी 15 दिन पहले ही जीतू पटवारी ने इसी प्रकरण का हवाला देकर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन का संकेत दिया था। बीजेपी में महाकौशल और विंध्य में कुछ विधायकों की नाराजगी और दल बदल करने वाले विधायकों के प्रकरण में उनके खिलाफ फैसला आने पर कांग्रेस बड़ी उम्मीद लगाए बैठी थी।
कांग्रेस से भाजपा में आए विधायकों को मंत्री बनाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका खारिज