फिल्म जीरो ने एक बौने आदमी की तकलीफ को नहीं छुआ -लिलीपुट

मुंबई, लिलीपुट ने कहा कि जब आप किसी नेत्रहीन या विकलांग व्यक्ति की भूमिका निभाते हैं तो आप उसकी तरह बर्ताव करते हैं और पब्लिक को कनविंस करते हैं कि आप वही हैं। लेकिन आप किसी बौने की भूमिका निभाकर पब्लिक को कैसे कनविंस करोगे? तमाम फिल्मों और टीवी शोज का हिस्सा रह चुके लिलीपुट ने साल 2018 में रिलीज हुई फिल्म जीरो पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि वह शाहरुख खान की जीरो से खास प्रभावित नहीं हुए। फिल्म उस मेंटल हैरासमेंट पर नहीं जाती है जो एक बौने व्यक्ति को सहने होते हैं। मिर्जापुर में दद्दा का किरदार निभा चुके लिलीपुट ने कहा कि शाहरुख खान को जीरो नहीं करनी चाहिए थी।
उन्होंने कहा, एक साधारण दिखने वाला इंसान किसी नेत्रहीन, विकलांग या गूंगे-बहरे शख्स की भूमिका निभा सकता है। उसे करना ही पड़ता है। जब आप किसी बौने शख्स का किरदार कर रहे हैं तो इसमें करने के लिए क्या होता है? एक बौना शख्स किसी साधारण इंसान की ही तरह बोलता, चलता, या सोचता है। बस उसके हाथ पैर छोटे होते हैं या शरीर विकृत होता है। आप किसी बौने की भूमिका निभाकर पब्लिक को कैसे कनविंस करोगे जब कि आप इतने मशहूर हो कि सभी को पता है आप बौने नहीं हो। शाहरुख खान को फिल्म क्यों नहीं करनी चाहिए थी इसका दूसरा कारण देते हुए लिलीपुट ने कहा कि ये फिल्म एक बौने आदमी की तकलीफ को नहीं छूती। उन्होंने कहा, जब आप किसी बौने शख्स का किरदार निभाने का फैसला करते हो तो आप उस भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक दिक्कत को नहीं छू पाते जो बौने लोगों को अपनी जिंदगी में झेलनी होती हैं।

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