नई दिल्ली, लद्दाख के गलवान घाटी चीन के धोखे के बाद भारत अपनी सीमाओं पर पूरी तरह से सतर्क हो गया है। भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) वास्तविक नियंत्रण रेखा पर 47 अतिरिक्त बॉर्डर आउटपोस्ट (बीओपी) पर जवानों की तैनाती बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस साल के शुरू में इसकी मंजूरी दी थी।
उल्लेखनीय है कि गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ खूनी झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हुए हैं। चीन के भी 43 सैनिकों के मारे जाने की खबर है। चीन से तनातनी के बीच आईटीबीपी ने अपने चंडीगढ़ और गुवाहाटी में अपने वेस्टर्न और ईस्टर्न कमांड को शुरू कर दिया है और जून के पहले हफ्ते में यहां के प्रमुखों की भी नियुक्ति कर दी है। पिछले साल अक्टूबर में केंद्रीय कैबिनेट ने इस पद को मंजूरी दी थी।
अधिकारियों ने बताया कि वेस्टर्न कमांड चीन से लगते लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा की निगरानी करेगा जबकि ईस्टर्न कमांड उत्तर और पूर्वोत्तर सीमा, जिसमें सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश शामिल हैं की निगरानी का जिम्मा संभालेगा। 47 बीओपी में 34 को अरुणाचल में बनाने की योजना है, जबकि 5 वेस्टर्न कमांड में बनेंगे। यह हिमालय इलाके में अस्थायी 12 बीओपी पोस्ट के अलावा होगा।
इन पोस्टों के जरिए आईटीबीपी के जवानों को राशन और ठहरने की जगह उपलब्ध कराई जाती है। उल्लेखनीय है कि इन बीओपी में भर्तियां और ट्रेनिंग कोविड-19 महामारी के कारण देरी हुई है। मार्च में आईटीबीपी के सेंटर्स को विदेशों से लौट रहे भारतीयों के लिए क्वारेंटाइन केंद्रों के रूप में बदल दिया गया था। बाद में इसका इस्तेमाल केंद्रीय सुरक्षा बलों, सीबीआई, एनआईए और आईबी के कोविड-19 पीड़ित जवानों के इलाज के लिए किया जाने लगा। 16 जून तक आईटीबीपी के इन सेंटरों पर करीब 130 जवानों का इलाज चल रहा है।
आईटीबीपी ने चीन से तनाव के बाद सीमा पर बनाने शुरु किए 47 नए बॉर्डर आउटपोस्ट