कोरोना संक्रमण से बचाव में सामाजिक दूरी के बजाय मास्क का उपयोग है अधिक कारगर

नई दिल्ली, कोविड-19 के संक्रमण से जूझ रही दुनिया में इसकी रोकथान को लेकर जारी प्रयासों के बीच एक नए शोध में दावा किया गया है कि मास्क का उपयोग कोरोना से बचाव में सामाजिक दूरी से भी अधिक कारगर है। अमेरिका के एक जर्नल में प्रकाशित इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मास्क के उपयोग की वजह से अब तक दुनियाभर में लाखों की संख्या में जानें बचाई गई हैं। अगर कोरोना के हॉटस्पॉट वाले इलाके में लोगों ने मास्क का इस्तेमाल न किया होता तो शायद इस वक्त संक्रमण के मामले कहीं ज्यादा होते।
रिसर्च में कहा गया है कि अमेरिका और इटली में लोगों के मास्क का इस्तेमाल शुरू करने के बाद संक्रमण की दर में तेजी के साथ कमी आई थी। एक शोधकर्ता के मुताबिक अप्रैल महीने में जब न्ययॉर्क में लोगों ने मास्क का वृहद स्तर पर इस्तेमाल किया था तो संक्रमण दर में तीन प्रतिशत तक की कमी आई थी। रिसर्च के मुताबिक कोरोना से बचाव के अन्य उपायों जैसे सोशल डिस्टेंसिंग, सैनेटाइजर से भी ज्यादा मास्क का इस्तेमाल कारगर साबित हुआ है। कहा गया है कि अगर लोग सही मास्क पहनते हैं तो कोरोना के इन्फेक्शन का खतरा काफी कम हो जाता है। गौरतलब है कि यूएस सेंटर फॉर डिसकस कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने अमेरिका में लोगों से अपील की है भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क जरूर पहनें। साथ ही जितना संभव हो सके मास्क के इस्तेमाल के बगैर घर से बाहर न निकलें। गौरतलब है कि हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मास्क पहनने संबंधी नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी की नई गाइडलाइंस में कहा गया है कि लोगों को उन जगहों पर मास्क पहनना चाहिए जहां पर सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन नहीं किया जा सकता। नए दिशा-निर्देश में जानकारी दी गई है कि फेस मास्क किन लोगों को पहनने चाहिए, किन परिस्थितियों में पहने जाने चाहिए और इनकी बनावट या सामग्री क्या होनी चाहिए। मास्क पहनने संबंधी दिशानिर्देशों को लेकर डब्ल्यूएचओ की आलोचना हुई है। कहा गया कि मास्क न लगाने संबंधी डब्ल्यूएच के दिशानिर्देशों की वजह से कोरोना दुनियाभर में तेजी के साथ फैला।

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