कोरोना मामले पर चीन की जांच को लेकर दुनिया के देशों की भारत पर टिकीं निगाहें

नई दिल्ली, भारत अगले हफ्ते विश्व स्वास्थ्य संगठन के एग्जिक्यूटिव बोर्ड का चेयरमैन बनने जा रहा है।इसके बाद पूरी दुनिया की नजरें भारत पर टिकी होंगी कि वह कोरोना के मुद्दे पर चीन के खिलाफ उठ रही आवाजों से कैसे निपटता है। कई देशों का आरोप है कि चीन ने इस महामारी के बारे में दुनिया को अंधेरे में रखा।इस कारण चीन के खिलाफ जांच की मांग की जा रही है। भारत डब्ल्यूएचओ में जापान की जगह लेगा। इस वैश्विक संस्था के साउथ-ईस्ट एशिया ग्रुप ने सर्वसम्मति से इस पद के लिए भारत के नाम का प्रस्ताव रखा था। भारत एग्जिक्यूटिव बोर्ड की अगली मीटिंग में यह पद संभालेगा। इसमें डब्ल्यूएचओ के 194 सदस्य देश और पर्यवेक्षक हिस्सा लेने वाले है। भारत उस समय यह पद संभालने जा रहा है जब चीन और अमेरिका के बीच कोरोना के मुद्दे पर तनाव चल रहा है। कई दूसरे देशों ने भी इस मुद्दे पर चीन के रुख का विरोध किया है। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस और जर्मनी चीन के खिलाफ जांच कर सकते हैं। इन देशों के नेताओं का साफतौर पर कहना है कि वे इस मामले में जांच चाहते हैं। वे जानना चाहते हैं कि यह वायरस कहां से आया, क्या चीन ने शुरुआत में इसके बारे में जानकारी छिपाने की कोशिश की और क्या चीन ने दुनिया को यह आगाह करने में देर की कि यह वायरस इंसान से इंसान में ट्रांसमिट होता है। हाल में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि कोरोना वायरस प्राकृतिक नहीं है और कोरोना को लैबोरेटरी में तैयार किया गया था। भारत की ओर से कोरोना मामले पर यह पहला आधिकारिक बयान था। भारत डब्ल्यूएचओ में सुधार की वकालत करता रहा है।
वहीं कोरोना मामले में डब्ल्यूएचओ की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ चुकी है। उस पर आरोप हैं कि वह इस मामले में चीन का गुणगान करता रहा जबकि चीन ने इसके बारे में उठने वाली आवाजों को दबाया और इसके बारे में दुनिया को जानकारी नहीं दी। डब्ल्यूएचओ के प्रमुख डॉ. टेड्रोस एडहेनॉम पर भी चीन के गुनाहों को छिपाने का आरोप लग रहा है और उनसे इस्तीफा मांगा जा रहा है। इस बीच अमेरिका और चीन के बीच तनातनी बढ़ गई है।

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