लॉकडाउन में जीव-जन्तु भी भूख से मरने को मजबूर, क्या अब एक-दूसरे का भोजन बनेंगे जानवर

लंदन,भयावह महामारी कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन के चलते जीव-जंतु भी भूख से मरने को मजबूर हैं। चिड़ियाघर के जानवर अब एक-दूसरे का भोजन बनेंगे। कोरोना महासंकट के इस दौर में अन्य व्यवसायों की तरह चिड़ियाघर प्रबंधक भी परेशानी झेल रहे हैं। जर्मनी के राष्ट्रीय चिड़ियाघर के प्रबंधकों का कहना है कि कोरोना लॉकडाउन से वे भी बेहाल हैं। सबसे बड़ी मुसीबत यह है कि चिड़ियाघर, कई अन्य व्यवसायों के विपरीत हाइबरनेशन में नहीं जा सकते हैं । जर्मनी के राष्ट्रीय चिड़ियाघर संघ का तर्क है कि चिड़िया घरों में जानवरों को प्रतिदिन खाना और उनकी देखभाल करना करना जरूरी है। वियना के शीर्ष आकर्षणों में से एक, शॉनब्रुनन चिड़ियाघर के प्रबंंधको का कहना है कि मौजूदा समय में खर्च को मैनेज करने के लिए 1 अप्रैल से इसने अपने 230 कर्मचारियों में से 70 फीसदी को तीन महीने के फरलो यानि नौकरी की सुरक्षा के साथ जबरन छुट्टी पर भेज दिया है लेकिन जानवरों के खानपान को लेकर समझौता मुश्किल होता जा रहा है।
जर्मनी के चिड़ियाघरों में से एक ने स्वीकार किया है कि कोरोना वायरस संकट में चिड़ियाघरों में कुछ जानवरों को जिंदा रखने के लिए अन्य जानवरों को उनका भोजन बनाना पड़ सकता है। न्यूमनस्टर झू के निदेशक वरेना कास्पारी ने बताया कि उन्होंने उन जानवरों को पहले ही सूचीबद्ध कर लिया है, जिन्हें पहले मारकर अन्य जानवरों का भोजन बनाना है। उन्होंने कहा कि चूंकि न्यूमनस्टर एक संघ से संबंधित है और छोटे व्यवसायों के लिए राज्य आपातकालीन निधि से वित्तीय सहायता प्राप्त करने का हकदार नहीं है, इसलिए चिड़ियाघर को कम विकल्पों के साथ छोड़ दिया गया है। सूचीबद्ध जानवरों का खुलासा किए बिना, कसपारी ने कहा कि जानवरों को मारने का “अप्रिय” विकल्प चिड़ियाघर की वित्तीय समस्या को हल नहीं करेगा इसलिए उन्होंने चिड़ियाघरों क सुचारू रखने के लिए चांसलर एंजेला मर्केल से 100 मिलियन यूरो मदद देने का आग्रह किया है।
उधर, आर्थिक मामलों के संघीय मंत्रालय और ऊर्जा ने आर्थिक विकास पर अपनी रिपोर्ट में कहा कि वैश्विक मांग में गिरावट, आपूर्ति श्रृंखलाओं में रुकावट, उपभोक्ता व्यवहार में बदलाव और निवेशकों के बीच अनिश्चितता सहित कई कारक अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव डाल रहे हैं। सरकार को उम्मीद है कि कोवीड-19 प्रतिबंधों में ढील के बाद वर्ष की दूसरी छमाही में आर्थिक सुधार होगा।चिड़ियाघर के निदेशक ने इस महामारी के चलते बसंत के दौरान रुपए 200,000 के नुकसान का अनुमान लगाया। उन्होंने कहा कि पेंगुइन को दैनिक आधार पर बड़ी मात्रा में ताजी मछलियों की आवश्यकता होती है और कर्मचारी उन्हें भूखा रखने के बजाय उनका उपयोग करना पसंद करेंगे। उन्होंने कहा कि चिड़ियाघरों में सबसे बुरा यही होने वाला है कि कुछ जानवरों को दूसरों को खिलाना होगा।

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