आमला में वन विभाग की लापरवाही कोरेना संक्रमण का खतरा फिर भी करवा रहे मजदूरों से कार्य..!

आमला,एक ओर जहाँ कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा पूरे देश मे मंडरा रहा है । स्वास्थ्य की रक्षा की दृष्टि से ट्रेनों से लेकर बस सफर पर रोक लगाई गई है। वहीं जिला भी लॉक डाउन हो गया है । जिला कलेक्टर द्वारा धारा 144 लागू की गई जिसमें 4 से अधिक व्यक्ति एक स्थान पर इकठ्ठा नहीं रह सकते है और तो ओर 31 मार्च तक सभी शासकीय कार्यालय जनपद की मजदूर मुलक योजनाएँ बन्द कर दी गई हैं । जिससे मजदूर या ग्राम के लोग कोरोना संक्रमण के शिकार न बनें, लेकिन वन विभाग आमला के रेंजर द्वारा शासन व जिला कलेक्टर के आदेशों की खुलेआम अवेहलना की जा रही है । जानकारी के मुताबिक वन परिसर में निर्माण हो रहे भवन के कार्य मे आधा दर्जन से अधिक मजदूर और राज मिस्त्रियों को कार्य पर लगा रखा है । वही कलमेश्वरा में निर्माण हो भवन के छत निर्माण की लोहा सरिया कटिंग करवाने भी आधा दर्जन से अधिक मजदूरों को सोमवार कार्य पर लगाया गया इतना ही नहीं तीसरा भोपाली में निर्माण हो रहे भवन में टाइल्स कार्य सोमवार भी चल रहा था जिसमे भी इसी तरह अधिक मजदूर कार्य कर रहे थे । इससे अंदाज लगाया जा सकता की स्थानीय रेंजर को मजदूरों की जान से कोई सरोकार नहीं है और ना ही शासन व कलेक्टर के आदेशों की कोई परवाह है।गौरतलब होगा कि शहर सहित ग्रामों की सीमाओं पर प्रशासन द्वारा चप्पे चप्पे पर नजर रखी जा रही है साथ ही मजदूरों के लोकल कार्य भी बन्द है ।कोरोना संक्रमण व शासन के आदेश के बाद सभी निर्माण कार्य चाहे निजी हो या सरकारी सब रुक गए हैं लेकिन फारेस्ट में बेधड़क मजदूरों से कार्य करवाकर उनकी जान से खिलवाड़ कर रहे है। अवगत हो कि उक्त रेंजर का तबादला अन्यत्र शहर हो गया है लेकिन वह यहाँ से जानबूझकर रिलीव नही हो रहे हैं। सूत्रों की माने तो इसके पीछे वजह यह बताई जा रही है कि 3 भवनों के निर्माण वे स्वयं पूर्ण करवाना चाह रहे है । निर्माण हो रहे प्रति इमारत भवन की लागत 20 लाख से अधिक है जिससे कलमेश्वरा ,आमला ,भोपाली के भवन लागत लगभग 60 लाख से अधिक हो सकती है । भवनों के हो रहे घटिया निर्माण के मामले भी प्रकाश में आ चुके है लेकिन विभाग के उच्च अधिकारियों ने आज तक कोई जांच नही करवाई वही रेंजर बड़ी तेजी से अधूरे भवनों के निर्माण पूर्ण करवाने में लगे हुए हैं । इस मामले में वन विभाग एस डी ओ से प्रतिक्रिया लेनी चाही लेकिन उन्होंने फोन काल रिसीव नहीं किया।
इनका कहना
यदि इतने अधिक मजदूरों से कार्य करवाया जा रहा है यह तो नियम विपरीत है। इस संबंध में विभाग के अधिकारियों से चर्चा की जाएगी।
सी एल चनाप
एस डी एम मुलताई।
आदेश के बाद भी अगर रेंजर भवनों के निर्माण में अधिक मजदूरों से कार्य करवा रहे हैं तो हम उनसे चर्चा करके ही कुछ बता पायेंगे ।
अशोक कुमार चौहान
डी एफ ओ वनविभाग बैतूल
( नवल-वर्मा की रिपोर्ट )

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