सऊदी अरब में इंडोनेशिया की महिला को रेप से बचने बॉस को जख्मी करने पर गला काटकर मौत की दी गई सजा

सऊदी अरब, किसी महिला की आबरू लूट रही हो,तब वह क्या करेगी? क्या आत्मरक्षा का अधिकार मानवाधिकार नहीं है? सऊदी अरब के इस्लामी कानून में शायद ऐसा नहीं। इस कारण ही रेप का विरोध करने वाली महिला को ही फांसी दे दी। वहां भी सरेआम बीच सड़क पर गला काट कर। इस महिला का कसूर इतना था कि उसने रेप कर रहे अपने बॉस पर हमला किया। जख्मी हुए बॉस की बाद में मौत हो गई। ये महिला इंडोनेशिया की थी। अब सऊदी अरब के खिलाफ इंडोनेशिया में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। एक बच्चे की माँ तुती तुरसीलवाती को मक्का प्रांत के तायफ शहर में फांसी दी गई। हालांकि इससे पहले न तो इंडोनेशियाई महिला के परिजनों को सूचित किया गया न ही वहां के दूतावास को। इसके बाद इंडोनेशिया के कई इलाकों में सऊदी अरब के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो चुके हैं। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो ने सऊदी विदेश मंत्री अदल अल जुबैर को खरी खोटी सुनाई है। उन्होंने टेलीफोन कर जुबैर से पूछा कि फांसी से पहले उनके देश को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई।
पिछले तीन साल में चार इंडोनेशियाई लोगों को सऊदी अरब में फांसी दी गई है। पहले भी इस तरह की निर्मम सजा से पहले इंडोनेशिया को सूचना नहीं दी गई। इंडोनेशिया में सऊदी अरब के राजदूत को तलब किया गया है। इंडोनेशियाई एडवोकैसी ग्रुप माइग्रैंट केयर ने सितंबर में कहा था कि तुती तुरसीलावति ने रेप से बचने के लिए बॉस पर हमला किया था। इंडोनेशियाई संसद के सदस्य आबिदिन फिकरी ने कहा, सऊदी अरब की राजशाही ने मानवाधिकारों को पूरी तरह इग्नोर कर दिया। जीने के अधिकार को लेने से पहले सौ बार सोंचना चाहिए। फांसी से ठीक एक हफ्ते पहले ही सऊदी अरब के विदेश मंत्री अल जुबैर ने इंडोनेशियाई विदेश मंत्री रेत्नो मर्सुदी और विडोडो से जकार्ता में बातचीत की। इसका एजेंडा ही अप्रवासी इंडोनेशियाई लोगों के साथ हो रहे व्यवहार पर केंद्रति था। मोर्सुदी ने जोर देकर कहा था कि उनके देश के किसी भी नागरिक को फांसी की सजा देने से पहले सूचित करना चाहिए। वहीं एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा है कि सऊदी अरब ने फांसी देकर कूटनीतिक संबंधों को खराब किया है। सऊदी अरब में इस्लामी शरिया कानून लागू है और अपराधों के लिए कड़े सजा के प्रावधान हैं। इनमें महिलाओं के अधिकार बेहद सीमित रखे गए हैं जिसके लिए सऊदी अरब की अंतरराष्ट्रीय आलोचना होती रहती है।

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