जयपुर, राजस्थान से राज्यसभा की तीन सीटें 10 अप्रैल को खाली होने जा रही हैं। लिहाजा राजस्थान की इन तीनों सीटों को लेकर कांग्रेस और भाजपा की तैयारियां शुरू कर दी है। लेकिन वोटों के गणित के मुताबिक राज्यसभा की खाली होने वाली तीनों सीटों में से दो सीटों पर कांग्रेस का पलड़ा भारी है। बताया जा रहा है कि इन तीन सीटों के लिए चुनाव की प्रक्रिया 15 मार्च तक पूरी हो जाएगी। हालांकि इस बारे में निर्वाचन आयोग की ओर से राज्यसभा का चुनाव कार्यक्रम जारी होना अभी बाकी है। प्रदेश में 2018 विधानसभा चुनाव के बाद बदले राजनैतिक समीकरणों का असर राजस्थान में 10 अप्रैल को रिक्त होने वाली राज्यसभा की तीन सीटों पर भी पड़ने वाला है। साल 2018 तक हुए राज्यसभा के चुनावों में प्रदेश की तमाम दस सीटों पर भाजपा काबिज थी लेकिन प्रदेश में सत्ता के बदलने के साथ ही प्रदेश की राज्यसभा की सीटों में भी पार्टियों का गणित बदलने लगा।
दरअसल,प्रदेश की तीन सीटों पर हो रहे चुनाव को लेकर पूरे 200 विधायकों के मान्य वोट हैं। प्रदेश की इन तीनों सीटों की बात करें तो हर एक सीट को जीतने के लिए प्रथम वरीयता के लिए 51 वोट चाहिए। कांग्रेस के पास है 107 विधायकों के वोट हैं,तब भाजपा के पास है 72 विधायकों के वोट हैं। कांग्रेस के पास 13 निर्दलियों में से अधिकतर का समर्थन है। अन्य छोटी पार्टियों और निर्दलीय विधायक को संख्या 21 है। 2 सीटों पर कांग्रेस, एक सीट बीजेपी को तय फॉर्मूले के अनुसार कांग्रेस को दो सीट जीतने के लिए 102 वोट चाहिए जो कि पर्याप्त रूप से उसके पास हैं। बात करे भाजपा के पास सदन में 72 विधायक हैं,इसकारण प्रथम वरीयता के 51 वोट चाहिए लिहाजा भाजपा के खाते में भी एक सीट आने वाली है। पिछले साल मदन लाल सैनी के निधन के बाद एक सीट रिक्त हुई थी। इस सीट पर पूर्व पीएम डॉ.मनमोहन सिंह चुने गए थे। वहीं इन तीन सीटों से भाजपा के राज्यसभा सदस्य ही रिटायर हो रहे हैं। इसमें रामनारायण डूडी, विजय गोयल और नारायण लाल पंचारिया हैं।
अप्रैल में राजस्थान से राज्यसभा की तीन सीटें हो रही खाली, भाजपा और कांग्रेस ने शुरू की तैयारियां