( विजय कुमार जैन द्वारा ) भोपाल,बीमारी है जिसका नाम सुनकर मरीज जीवन से निराश हो जाता है। मरीज यह मान लेता इस बीमारी के चलते असहनीय कष्ट झेलना है इलाज में लाखों रुपये लगना है और असमय मृत्यु भी निश्चित है। हाल ही जारी आँकडों के अनुसार देश के हृदय स्थल मध्यप्रदेश में पिछले 5 वर्ष में कैंसर के मरीजों की संख्या 25 प्रतिशत बढ़ी है। पुरुषों में मुख और महिलाओं में स्तन एवं गर्भाशय कैंसर के मरीजों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है।कैंसर के मामले में मध्यप्रदेश का नंबर देश में पाँच हो गया है।उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और पश्चिमी बंगाल के बाद कैंसर के सबसे ज्यादा मरीज मध्यप्रदेश में है।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने आँकडे जारी कर उल्लेख किया है सन 2014 से 2018 के बीच कैंसर के मरीजों में एक चौथाई वृद्धि हुई है। सन 2014 मरीजों की संख्या लगभग 41 हजार थी,जो 2018 में लगभग 50 हजार हो गई। चिंता का विषय है कि महिलाओं में स्तन और गर्भाशय कैंसर में भी वृद्धि हो रही है। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 15 हजार महिलाएं कैंसर की शिकार है। यह तथ्य सर्वविदित है कि पुरुषों को मुख कैंसर गुटखा पाउच के निरंतर सेवन से होता है।कैंसर के मरीजों के वृद्धि का सबसे बड़ा कारण खाद्य पदार्थों में मिलावट, अनाज,दलहन, फल, सब्जियों के उत्पादन में निरंतर कीटनाशकों का हो रहा प्रयोग है।
रासायनिक खाद का उपयोग अधिक पैदावार लेने किया जा रहा है। रासायनिक खाद और कीटनाशकों के खेती में उपयोग करने से आम जनता के जीवन को खतरा पैदा हो गया है। कृषि विभाग द्वारा हाल में जारी रिपोर्ट के अनुसार देश के विभिन्न क्षेत्रों में फल,सब्जियों, अण्डों और दूध में कीटनाशकों की उपस्थिति के अध्ययन से स्पष्ट हुआ है कि इन सभी में इनकी न्यूनतम स्वीकृत मात्रा से काफी अधिक मात्रा पाई गई है। हाल ही में देश के विभिन्न हिस्सों से एकत्र किये गये खाद्यान्न के नमूनों का अध्ययन देश के 20 प्रतिष्ठित प्रयोगशालाओं में किया गया। अधिकांश नमूनों में डी डी टी,लिण्डेन और मोनोक्रोटोफास जैसे खतरनाक और प्रतिबंधित कीटनाशकों के अंश इनकी न्यूनतम स्वीकृत मात्रा से अधिक मात्रा में पाये गये है। टमाटर के नमूनों में डी डी टी की मात्रा 108 गुनी ज्यादा इलाहाबाद में पाई गई। सेव के नमूने में क्लोरडेन नामक कीटनाशक गोरखपुर में पाये गये। दूध के प्रसिद्ध ब्रांड अमूल में क्लोरपायरिफास नामक कीटनाशक के अंश अहमदाबाद में पाये गये। पोल्ट्री उत्पाद के नमूने में घातक इण्डोसल्फान के अंश स्वीकृत मात्रा से 23 गुनी अधिक मात्रा में मुंबई में मिले है। फू्लगोभी के नमूने में क्लोरणयरीफास की उपस्थिति अमृतसर में दर्ज की गई। असम के चाय बागान से लिये गये चाय के नमूनों में जहरीले फेनप्रोपथ्रिन के अंश पाए गये, जबकि यह चाय के लिये प्रतिबंधित कीटनाशक है। गेहूँ और चावल के नमूनों में ऐल्ड्रिन और क्लोरफेनविनफास नामक कीटनाशक के अंश पाए गये है।उपरोक्त सभी कीट
नाशक कैंसर जन्य एवं स्वास्थ्य के लिये हानिकारक है।
प्रबंधन विशेषज्ञ सुप्रसिद्ध लेखक एन.
रघुरामन ने अपने संस्मरण लिखकर उल्लेख किया है विगत दिवस वे इंदौर के समीप गाँव सनावदिया पहुंचे। वहाँ सब्जी पैदा करने बाले किसानों ने चर्चा हुई। इनमें आँर्गनिक खेती करने बाले कुछ किसान भी थे। इस चर्चा ने रघुरामन को हिला दिया। क्षेत्र के ज्यादातर लोग पत्ता गोभी या फूल गोभी नहीं खाते है, जिन्हें वे खुद उगाते है। वे इन्हें सिर्फ शहर में बेचने के लिए उगाते हैं। जहाँ चमकदार सब्जियां पसंद की जाती है।ऐसा इसलिये क्योंकि वे किसान छह से ज्यादा प्रकार के केमिकल इन पर छिड़कते हैं और खुद यह जहर खाना नहीं चाहते हैं। गोभी जितना सफेद होता है, वह उतनी ही ऊंची कीमत पर बिकता है। लेकिन इसमें कीड़ों को मारने के लिये ढ़ेर सारा जहर भी होता है।रघुरामन आगे लिखते है मैंने उनसे समझने की कोशिश की कि वे शरीर के लिए हानिकारक केमिकल कैसे इस्तेमाल करते हैं, जो फल
और सब्जियों को चमकदार बनाते है। अगर इसमें मैं भिंडी, टमाटर और दूसरी सब्जियों को जोड़ना शुरू कर दूं तो आप सब्जियां खाना ही बंद कर देंगे।
रघुरामन जी ने हमारी आँखें खोल दी। मैं स्वयं यह विचार करता रहता था कि मेरे गृह नगर राघौगढ़ में जैन समाज की महिलाओं को कैंसर क्यों हो रहा है, जैन समाज का भोजन तो शाकाहारी होता है, अब मुझे समझ में आया कि खाधान्न, फल,सब्जी, दूध, घी सब में मिलावट है।
मप्र में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के मरीजों की तादाद लगातार बढ़ रही