संविधान की मूल भावना को आहत करने वाले लोगों को दो माकूल जबाव

भोपाल,मध्यपटादेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा है कि देश आज एक ऐसे कठिनतम दौर से गुजर रहा है जहां जनता की वास्तविक समस्याओं को सुलझाने की बजाय केन्द्र सरकार स्वयं नित नये ऐसे मुद्दे ईजाद कर रही है, जिनके कारण भारत की सामाजिक समरसता और सदियों पुरानी गौरवशाली सभ्यता पर गंभीर प्रहार हो रहे हैं।
उन्होंने एक सन्देश में कहा कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) जैसी अवधारणाओं के माध्यम से भारतीय संविधान की उस मूल भावना को आहत किया जा रहा है, जिसमें स्पष्ट रूप से यह अभिव्यक्त किया गया है कि जाति, धर्म और भाषा के आधार पर भारत के नागरिकों के बीच कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री के अनुसार ‘ यह हम सब भारतीयों का परम कर्त्तव्य है कि हम उस संविधान की रक्षा करें, जिसे मूर्त रूप इस देश के महान मनीषियों और स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानियों ने दिया था। यह भी अजीब संयोग है कि आज वही लोग संविधान की मूल भावना पर प्रहार कर रहे हैं, जिनका आजादी के संघर्ष में कभी कोई योगदान नहीं रहा। ‘
उन्होंने अपने सन्देश में कहा ‘ उपर्युक्त संदर्भ और देश के वर्तमान राजनैतिक परिदृश्य में हम पर यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है कि हम नागरिकों की न्याय के सम्मुख समानता, स्वतंत्रता और अपने गौरवशाली संविधान की रक्षा करें। अपनी इसी भावना के अनुरूप, हम संविधान को बचाने के लिए जो ‘‘शांति मार्च’’ निकाल रहे हैं, उसमें हम प्रदेश की जागरूक जनता, राजनैतिक दलों, सामाजिक -व्यापारिक संगठनों, छात्रों और बुद्धिजीवियों से यह आग्रह करते हैं कि वे बड़ी से बड़ी संख्या में सम्मिलित होकर, भारतीय संविधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित कर भारतीय संविधान की मूल भावनाओं को आहत करने वाले लोगों को माकूल जबाव दें। ‘

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