भारत की विविधता में एकता समझाना हो तो अयोध्या निर्णय का उल्लेख होगा – मोदी

नई दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम संबोधन संबोधन में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले में आज जो फैसला सुनाया है उससे दशकों पुरानी समस्या सुलझ गई है। उन्होंने कहा कि इस फैसले के बाद जिस प्रकार हर वर्ग, समुदाय के लोगों ने इसे स्वीकार किया है, वह भारत की विविधता में एकता को दर्शाता है, हजारों साल बाद भी किसी को विविधता में एकता को समझाना होगा तो वह इस घटना का जरूर उल्लेख करेगा।
उन्होंने देश की जनता से शांति, सौहार्द और सद्भाव का महौल बनाने की अपील की। पीएम मोदी ने कहा ‘ आज अयोध्या पर फैसले के साथ ही, 9 नवंबर की ये तारीख हमें साथ रहकर आगे बढ़ने की सीख भी दे ही है। आज के दिन का संदेश जोड़ने का है-जुड़ने का है और मिलकर जीने का है।’ उन्होंने कहा कि नए भारत में भय, कटुता, नकारात्मकता का कोई स्थान नहीं है, सर्वोच्च अदालत का ये फैसला हमारे लिए एक नया सवेरा लेकर आया है। उन्होंने कहा ‘ इस विवाद का भले ही कई पीढ़ियों पर असर पड़ा हो, लेकिन इस फैसले के बाद हमें ये संकल्प करना होगा कि अब नई पीढ़ी, नए सिरे से न्यू इंडिया के निर्माण में जुटेगी। अब समाज के नाते, हर भारतीय को अपने कर्तव्य, अपने दायित्व को प्राथमिकता देते हुए काम करना है। हमारे बीच का सौहार्द,हमारी एकता,हमारी शांति, देश के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।’
उन्होंने कहा ‘ हम सभी जानते हैं कि परिवार का एक मसला भी सुलझाना हो तो यह आसान नहीं होता है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को पूरे धैर्य के साथ सुना और इसके लिए पूरा देश उनका आभारी है। आज 9 नवंबर है, जिस दिन बर्लिन की दीवार गिरी, इसी दिन दुनिया ने एक नया संकल्प लिया था। आज करतारपुर कॉरिडोर की शुरुआत हुई, जिसमें भारत और पाकिस्तान का सहयोग रहा है। 9 नवंबर की तारीख हमें साथ में आगे बढ़ने की सीख दे रही है।’
उन्होंने कहा कि किसी के मन में किसी भी प्रकार की कटुता रही है, उसको तिलांजलि देने का भी दिन है।
राष्ट्र के नाम संबोधन से पहले पीएम मोदी ने पहली प्रतिक्रिया के तौर पर ट्वीट कर कहा था ‘ देश के सर्वोच्च न्यायालय ने अयोध्या पर अपना फैसला सुना दिया है। इस फैसले को किसी की हार या जीत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। रामभक्ति हो या रहीमभक्ति, ये समय हम सभी के लिए भारतभक्ति की भावना को सशक्त करने का है। देशवासियों से मेरी अपील है कि शांति, सद्भाव और एकता बनाए रखें।’ उन्होंने कहा ‘ सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला कई वजहों से महत्वपूर्ण है: यह बताता है कि किसी विवाद को सुलझाने में कानूनी प्रक्रिया का पालन कितना अहम है। हर पक्ष को अपनी-अपनी दलील रखने के लिए पर्याप्त समय और अवसर दिया गया। न्याय के मंदिर ने दशकों पुराने मामले का सौहार्दपूर्ण तरीके से समाधान कर दिया।’

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