योगी सरकार ने नहीं जुटाए 70 लाख इस लिए हुई 70 मासूमों की मौत- डॉ. कफील

भोपाल, उत्तर प्रदेश के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन खत्म होने से 70 मासूमो की मोत के मामले मे पहले आरोपी ओर बाद मे अदालत से बेगुनाह साबित होकर बाहर आये डॉक्टर कफिल खान ने योगी सरकार पर जमकर हमला बोलते हुए कहा की योगी सरकार ने अपने करीबियो को बचाने के लिये मुझे आरोपी बनाया था। भोपाल में कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के सरकारी निवास पर आये पत्रकारों से बात करते हुए डॉ कफील ने कहा कि 10 अगस्त 2017 को ऑक्सीजन खत्म होने से 70 बच्चों की मौत हुई थी। मैने अपने साथियों के साथ मिलकर आक्सीजन की व्यवस्था की। इसके बाबजूद मुझे सरकार ने झूठे केस में फसाकर जेल भिजवा दिया। उन्होने आगे कहा की 9 महीने तक मे जेल में रहा, मुझे अदालत से भी 9 महीने में जमानत नहीं मिल पाई थी। इस दोरान मेरे परिवार को प्रताडित किया गया। डॉ कफील ने आगे कहा कि 400 बच्चों में से 70 बच्चों की मौत हो गई थी। जिसकी बजह यह है की योगी सरकार ने 70 लाख रुपये नहीं चुपाए थे, इस कारण ऑक्सीजन नही मिल पाया। उन्होंने बतया की उत्तर प्रदेश सरकार के तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री आशुतोष टंडन को बचाने के लिए योगी सरकार ने मुझ पर आरोप लगाए। उन्होने आक्रोशित होकर कहा की सरकार सिर्फ इस प्रयास मे लगी थी की जिन्होंने 70 लाख रुपये नहीं चुकाए उन्हें कैसे बचाया जाए। डॉ कफील ने आरोप लगया की योगी सरकार पूर्व स्वास्थ्य मंत्री आशुतोष टंडन और प्रमुख सचिव स्वास्थ्य को बचाने के लिए मुझे फसाया है। इस मामले के लिए जिम्मेदार है, जिन्हें बचाने के लिए योगी सरकार कवायद कर रही है। डॉ. कफील ने आगे बताया कि पूरे मामले की जांच करने वाले आईएएस अधिकारी हिमांशु कुमार ने अपनी जांच रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया है, कि डॉ. कफील इस मामले के दोषी नहीं हैं। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में कफील के मौके पर न होने, उनके छुट्टी पर होने और उनके सेवाकाल के लिहाज से उनकी जिम्मेदारी को लेकर सारी बातें स्पष्ट की हैं। इसके बाद भी उन्हें दोषी माना जा रहा है, और प्रताडि़त करने का कोई मौका नहीं छोड़ा जा रहा। उनका कहना है की यहां तक डॉ. कफील के भाई को ऐसे स्थान पर गोलियों से मार दिया गया, जहां महज 500 मीटर की दूरी पर मुख्यमंत्री खुद मौजूद थे। इसके बाद भी उनके जख्मी भाई को एम्बुलेंस में लेकर पुलिस घंटों सड़कों पर घूमती रही, ताकि वह जिंदा न बच सके। उन्होने अंत मे कहा की पुलिस, जेल, अदालत, प्रशासनिक पूछताछ और कार्यवाहियों से बाहर निकलने के बाद उनके सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने को भी अपराध के रूप में देखा जा रहा है। उनके फेसबुक, ट्विीटर, व्हाट्सअप आदि की पोस्टों को आधार बनाकर भी उनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज कराए जा रहे हैं। डॉ. कफील अपने साथ हुए अन्याय और बच्चों की मौत के असली जिम्मेदारों को सजा दिलाने की मांग को लेकर देशभर में अपनी बात कह रहे हैं। इसी कड़ी में उन्होंने राजधानी भोपाल में फिर दोहराया कि मामले की जांच सीबीआई से करवाई जाना चाहिए।

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