भोपाल, मध्यप्रदेश में नया राजनीतिक तूफान शांत नहीं हो रहा है। निकाय चुनाव के अध्यादेश को रोकने पर राज्यपाल पर हो रहे जुबानी हमलों से वे नाराज हो गए हैं। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा द्वारा राज्यपाल को राजधर्म याद दिलाने वाले सुझाव और वन मंत्री उमंग सिंगार के ससरकार की अनुशंसा पर फैसला करने वाले बयान ने मामला बिगाड़ दिया है। अब राजभवन ने कहा कि सरकार ऐसे अध्यादेश जारी कर सकती है या नहीं? इस मामले की जांच संविधान के विशेषज्ञों से कराई जाएगी।
गौरतलब है कि कमल नाथ सरकार ने नगर निगम, परिषद सहित सभी निकाय चुनावों में अध्यक्ष के चुनाव के प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली को बदलना चाहा है। सरकार इन चुनावों को अप्रत्यक्ष प्रणाली से कराना चाहती है। यानी अब पार्षद अध्यक्ष का चुनाव करेंगे, जबकि पूर्व में जनता सीधे महापौर, अध्यक्ष को चुनती थी। इसी बदलाव को लेकर सरकार ने अध्यादेश को मंजूदी दी और उसे राज्यपाल लालजी टंडन को भेजा था, जिसे उन्होंने रोक दिया । विवाद यहीं से शुरू हो गया है। इसके बाद भाजपा-कांग्रेस के नेता सार्वजनिक मंचों पर बयानबाजी कर रहे हैं, इससे राज्यपाल नाराज हो गए हैं।
राजभवन-सरकार में टकराव,राज्यपाल नगरीय निकाय संशोधन अध्यादेश का कानूनी परीक्षण कराएंगे