छिंदवाड़ा, जिले के 220 होमगार्ड जवानों को 2 महीने से वेतन नहीं पाया है। वेतन न पाने से जवानों के परिवार में आर्थिक संकट के हालात निर्मित हो रहे है। वेतन न मिलने के कारण सरकार से बजट का अलॉटमेंट नहीं होना बताया जा रहा है। होमगार्ड जवानों को प्रतिमाह 21 हजाार 822 रुपए फिक्स वेतन दिया जाता है। जिले में हर माह करीब 50 लाख रुपए का भुगतान होता है। बिना वेतन के होमगार्ड जवानों और उनके परिजन के सामने गुजर-बसर करना मुश्किल हो रहा है। जवानों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जून माह में सिर्फ 15 दिन का वेतन दिया गया जबकि जुलाई-अगस्त का वेतन अब तक नहीं मिल पाया है। जवानों का कहना है कि दो महिने बिना वेतन के वे रात-दिन अपनी ड्यूटी बखूबी निभा रहे है और उनसे पूरा काम लिया जा रहा है लेकिन वेतन नहीं दिया जा रहा है। जुलाई में बच्चों के स्कूलों के एडमिशन तो उन्होंने किसी तरह करा लिए है। लेकिन त्यौहार मनाने के लिए जरूरी सामग्री वे कहां से खरीदे किसी तरह उधारी में काम चल रहा है। वेतन नहीं मिलने से बच्चों की फीस जमा नहीं हो रही है। जवानों का कहना है कि विभागीय अधिकारी उन्हें किश्तों में पेमेंट कर रहे है। ऐसे में उन्हें घर चलाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। वैसे भी उन्हें शासन द्वारा दिए जाने वाले भत्तों और दूसरी सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है। जो सुविधा और लाभ शासन द्वारा उनके लिए तय किए गए है वो जानबूझकर उन्हें नहीं दिया जा रहा है। इस मामले में होमगार्ड कमांडेंट स्नेहलता पाठ्या का कहना है कि जवानों का 16 जून से 5 जुलाई तक का वेतन आ गया है जो उनके खाते में डाला जा रहा है।
स्वीकृत है 320 जवान
जिले में वैसे तो 320 होमगार्ड जवानों के पद स्वीकृत है। लेकिन यहां स्वीकृत बल की तुलना में केवल 220 जवानों की ही पदस्थापना की गई है। इसके इतने कम जवानों को विभाग प्रतिमाह भुगतान नहीं करा पा रहा है। जवानों की माने तो कार्यालय में कार्यरत अन्य जवानों को प्रतिमाह भुगतान किया जा रहा है लेकिन फील्ड में काम करने वाले होमगार्ड के जवान वेतन को तरस रहे है।
छिंदवाड़ा में होमगार्ड के जवानों को दो महीने से नहीं मिला वेतन, बदहाली में जीने को मजबूर परिवार