तीन तलाक बिल के पीछे मकसद मुस्लिम परिवारों की तबाही-गुलाम नबी

नई दिल्ली, तीन तलाक बिल को लेकर राज्यसभा में मंगलवार को जोरदार बहस हो रही है। इस बीच राज्यसभा में कांग्रेस के नेता गुलाम नबी आजाद ने मोदी सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह मुस्लिमों के घरों को बर्बाद करने की साजिश है। इसके साथ ही कांग्रेस नेता ने मोदी सरकार से तीन तलाक की बजाय मॉब लिंचिंग को लेकर कानून बनाने को कहा। उन्होंने आरोप लगाता हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद मॉब लिंचिंग को लेकर कोई कानून बनाने की कोशिश नहीं है।
आजाद ने कहा, बिल एक है, लेकिन इसके पीछे का मकसद दूसरा है। बिल है विवाहित मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों का संरक्षण, लेकिन मकसद है मुस्लिम परिवारों की तबाही। वह इस बिल का असली मकसद है। कांग्रेस लीडर ने कहा कि एक-डेढ़ साल पहले ही मैं समझ गया था कि मुस्लिम महिलाओं के नाम पर मुसलमानों को खत्म करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह इस तरह की कोशिश है कि न रहे बांस न बजे बांसुरी। इस मौके पर आजाद ने तल्ख तेवर अपनाते हुए कहा, माब लिंचिंग होती है तो सरकार की, किसी पार्टी की बड़ी बदनामी होती है तो सबसे अच्छा है कि मुसलमानों के घरों में घर के चिराग से आग लगाओ। घर भी जल जाएगा और किसी को आपत्ति भी नहीं होगी।दो समुदायों के झगड़े में किसी का घर बन जाए तो बड़ा केस बनता है,लेकिन शॉर्ट सर्किट से पूरा मोहल्ला, पूरा शहर भी जल जाए तो कोई केस नहीं बनता है।इसकारण , इस खानदान को खत्म करना है तो घर से ही खत्म कर दो।’
कांग्रेस नेता ने कहा, कानून मंत्रीजी, मैं तब समझ गया था, जब आप और स्वर्गीय अनंत कुमारजी (तत्कालीन संसदीय कार्य मंत्री) मेरे पास आए थे। उस वक्त मैंने कुछ आपत्ति जताई थी,आपने वे आपत्तियां हटाई नहीं, बल्कि कॉस्मेटिक सर्जरी कर दी। मेरे कमरे में एक-डेढ़ घंटे के दौरान हुई चर्चा के दौरान मैंने बताया था कि इस्लाम में शादी-ब्याह एक सिविल कॉन्ट्रैक्ट है। आप इस सिविल कॉन्ट्रैक्ट को क्रिमिनल शक्ल दे रहे हैं।’ दूसरी बात बताई थी कि आप इस संज्ञेय अपराध बना रहे हैं, जिसमें पुलिस बिना वॉरंट के आरोपी को गिरफ्तार कर सकती है। मेरी तीसरी आपत्ति तीन साल की सजा पर थी और आपने जोड़ दिया कि गुजारा भत्ता भी देना है,बच्चों-बीवी का भी ख्याल रखना है। अब मैं यह पूछना चाहता हूं कि जब आरोपी पति जेल में रहेगा तब तक सरकार महिला को कुछ रकम देगी?

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