अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं रही ठप, 3 हजार डाक्टर रहे हड़ताल पर, मरीज हुए परेशान

भोपाल, इंदौर-भोपाल सहित प्रदेश के 13 सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के डॉक्टरों के अपनी मांगों को लेकर बुधवार को सामूहिक हड़ताल पर जाने से सरकारी अस्पतालों में एकदम से स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गईं। अस्पतालों के ओपीडी और वार्डों में इलाज के लिए सुबह से ही लोग यहां-वहां परेशान होते रहे। डॉक्टरों के नहीं आने से ओपीडी में लंबी-लंबी कतारें लग गईं। हड़ताल का ऐलान मप्र मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन ने किया है। हड़ताल में 13 मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों के 1 हजार से ज्यादा डॉक्टर हड़ताल में शामिल हुए। इस दौरान अस्पतालों में केवल इमरजेंसी सेवांए चालू रखी गई। हड़ताल के मद्देनजर सरकार ने एस्मा लगाया है।
भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज के 220 मेडिकल टीचर्स भी के इस आंदोलन में शामिल हुए। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, रीवा, सागर और जबलपुर सहित सात नए मेडिकल कॉलेज रतलाम, विदिशा, दतिया, खंडवा, छिंदवाड़ा, शिवपुरी और शहडोल के मेडिकल कॉलेजों के टीचर्स एवं डॉक्टर सातवां वेतनमान की मांग कर रहे हैं।
पहले कर चुके हैं हड़ताल
2018 में मध्य प्रदेश मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन ने तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से इन मांगों को लेकर चर्चा की थी. लेकिन उनकी मांग अब तक पेंडिंग हैं. 26 सितंबर 2018 को मुख्यमंत्री बंगले का घेराव भी किया गया था। इस दौरान उन्हें आयुष्मान भारत योजना में इलाज करने पर प्रोत्साहान राशि देने और निजी प्रैक्टिस नहीं करने को कहा गया था। एसोसिएशन ने दोनों शर्तों को अमान्य करते हुए सभी विभागों की तरह सातवां वेतनमान देने की मांग की थी।
13 मेडिकल कॉलेज 3300 डॉक्टर
आज पूरे प्रदेश में कुल 3300 चिकित्सा शिक्षक सामूहिक अवकाश पर चले गए हैं। इसके बाद डॉक्टर 24 से 26 जुलाई तक 3 दिन का सामूहिक अवकाश भी लिया जाएगा। यदि फिर भी मांगें नहीं मानी गईं तो 15 दिन बाद 10 अगस्त को सामूहिक इस्तीफा दिया जाएगा।
डॉक्टर्स की ये हैं मांगें
1-सातवें वेतनमान का लाभ दिया जाए
2-मेडिकल रिएंबर्समेंट का लाभ दिया जाए
3-मातृत्व अवकाश की मांग
4-कार्य के घंटे निर्धारित हो
5-ग्रेच्युटी की मांग
6-2004 में लागू पेंशन स्कीम का लाभ दिया जाए

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