मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के लाखों लोगों की प्यास बुझाने वाली बैनगंगा नदी इन दिनों खुद अपनी प्यास बुझाने तरस रही

सिवनी/बालाघाट,भरी गर्मी में विशाल नदी का सूखा दृश्य देखकर आप दहल सकते हैं। महाकौशल की बड़ी नदियों में शुमार बैनगंगा का यह दृश्य है। मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के लाखों लोगों की प्यास बुझाने वाली बैनगंगा नहीं खुद प्यास बुझाने तरस रही है। सिवनी, बालाघाट जिले की लाइफलाइन मानी जाने वाली बैनगंगा पूरी तरह सूख चुकी है। बैनगंगा में में दो बड़े बांध बनाए गए हैं जो दोनों जिलों के लाखों किसानों और शहरी-ग्रामीण आबादी को पीने का पानी सप्लाई करते हैं। सिवनी में अल्प बारिश के कारण यह विशाल नदी समय से पहले ही सूख चुकी है। बैनगंगा बचाने अभियान चला रहे विपिन शर्मा बताते हैं कि पिछले दो वर्षों से सिवनी में बारिश कम हो रही है। इस वर्ष भी जिला सूखाग्रस्त घोषित हुआ है। ऐसे में बैनगंगा का अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है।
एक नजर में बैनगंगा की कहानी
सिवनी जिले के ग्राम मुंंडारा से है उद्गम स्थल
देश के सबसे लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच-7 से गुजरती है
लखनवाड़ा, दिघौरी, बंडोल, छपारा, मंझगवां सहित कई तीर्थ हैं नदी किनारे
भीमगढ़ में बैनगंगा नदी पर एशिया का सबसे बड़ा मिट्टी का बांध ‘संजय सरोवर बांध बनाया गया है
उगली के पास हिर्री नदी में मिलकर विशाल रूप धारण कर लेती है बैनगंगा
बालाघाट में बैनगंगा पर डूटी बांध बनाया गया है
बालाघाट पार करते हुए महाराष्ट्र के भंडारा जिले में गोदावरी नदी में समाप्त हो जाती है बैनगंगा

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