रोमिला थापर का लेख भाजपा भारत को धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र से हिंदू धार्मिक राज्य बनाने की कोशिश कर रही

नई दिल्ली,भारत की सत्ताधारी पार्टी अपनी हिंदू राष्ट्रवादी विचारधारा को सही ठहराने के लिए देश के इतिहास को पुन: लिखने का कार्य कर रही है। यह बात मशहूर इतिहासकार सुश्री रोमिला थापर ने अपने एक लेख में कही है, जिसे अमेरिकी अखबार न्यूयार्क टाईम्स ने प्रमुखता से प्रकाशित किया है। सुश्री थापर लिखती हैं कि साल 2014 के आमचुनाव में जीत हासिल करने के बाद नरेंद्र मोदी और उनकी भारतीय जनता पार्टी ने भारतीय इतिहास को फिर से लिखने के लिए नए सिरे से प्रयास किए, ताकि हिंदू राष्ट्रवादी विचारधारा को वैध बनाया जा सके। वैसे इस तरह के प्रयास तभी शुरू हो गए थे जबकि भाजपा पहली बार 1999 और 2004 के बीच भारत की सत्ता में काबिज हुई थी।
इतिहासकार सुश्री थापर का यह लेख ‘दे पेडल मेथ्स एंड काल इट हिस्ट्री’ शीर्षक से ‘द न्यूयार्क टाइम्स’ में प्रकाशित किया गया है। लेख के जरिए सुश्री थापर कहती हैं कि पिछले आमचुनाव में जीत हासिल करने के साथ ही नरेंद्र मोदी और भाजपा ने इतिहास को फिर से लिखने का काम शुरु किया, ताकि हिंदूवादी विचारधारा को सही ठहराया जा सके। सुश्री थापर लिखती हैं कि श्री मोदी की सरकार और उनकी पार्टी द्वारा संचालित विभिन्न राज्यों की सरकारों ने इतिहास को बदलने के लिए तरह-तरह की कोशिशें की हैं, इनमें पब्लिक स्कूल की पाठ्यपुस्तकों से ऐसे अध्याय या तथ्यों को हटा दिया गया, जिनसे विचारधारा मेल नहीं खाती थी और उनकी जगह अपनी विचारधारा वाली सामग्री को जोड़ दिया गया। इस तरह बदले हुए संस्करणों को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा संचालित स्कूलों में इतिहास के तौर पर पढ़ाया जा रहा है। सुश्री थापा सवाल करती हैं कि हिंदू राष्ट्रवादियों के लिए इतिहास इतना महत्वपूर्ण क्यों है? अतिराष्ट्रवादियों को वर्तमान में अपने कार्यों को वैध ठहराने की आवश्यकता है, इसलिए भारतीय इतिहास के विशेष संस्करण की आवश्यकता है, इसके लिए भारतीय इतिहास को पूनर्जीवित करना और हिंदूवादी विचारधारा को सही ठहराना प्रमुख कार्य हो गया है।
सुश्री थापर कहती हैं कि मोहनदास करमचंद गांधी और जवाहरलाल नेहरु के नेतृत्ववाली भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की समान समावेशी वाले दृष्टिकोण को दो विचारधाराओं ने 1920 के दशक में सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया और चुनौतियां खड़ी कीं। इसमें एक मुस्लिम लीग थी जो कि मुस्लिम जमींदारों और शिक्षित मध्यम वर्ग द्वारा स्थापित एक पार्टी थी, जिसने मुस्लिम राष्ट्रवाद का प्रतिनिधित्व करने का दावा किया। वहीं दूसरी हिंदू महासभा थी, जो कि उच्च-जाति, मध्यम-वर्ग के हिंदुओं द्वारा बनाई गई थी, जिसमें कहा गया कि यह हिंदू राष्ट्रवाद का प्रतिनिधित्व करती है। इसे बाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में रूपांतरित किया गया, जिसे आरएसएस भी कहते हैं। यहां मुस्लिम लीग ने 1947 में पाकिस्तान के निर्माण का नेतृत्व किया, जबकि आरएसएस और इसके सहयोगी अभी भी भारत को एक धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र से एक हिंदू धार्मिक राज्य में बदलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इस प्रकार सुश्री थापर ने इतिहास के उदाहरण पेश करते हुए बतलाने की कोशिश की है कि किस प्रकार से धर्मनिर्पेक्ष लोकतांत्रिक देश को एक हिंदूवादी राष्ट्र बनाने की साजिश चल रही है और इसमें मोदी सरकार और भारतीय जनता पार्टी भी सहयोग करने में लगे हुए हैं।

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