मोहाली,एक चिकित्सक की लापरवाही के कारण एक गर्भवती महिला को अपने नवजात शिशु से हाथ दोना पड़ा। पंजाब के मोहाली के सिविल अस्पताल फेज-6 की एमडी गायनाकोलॉजिस्ट डॉ. रेनूका जिंदल पर फोन पर डिलिवरी करवाने के संगीन आरोप लगे हैं। यह आरोप मोहाली जिले के गांव पलहेड़ी निवासी संदीप सिंह ने लगाए हैं। संदीप सिंह का आरोप है कि उनकी पत्नी कुलविंदर कौर की डिलिवरी के समय डॉ. रेनुका अस्पताल में मौजूद नहीं थी। उसकी पत्नी को दो नर्सों के सहारे छोड़ा हुआ था और वहीं उनकी पत्नी को ऑपरेट कर रही थीं। जिस कारण उनकी नवजात बच्ची की मौत हो गई। संदीप कुमार ने बताया कि जब केस खराब होने लगा तो दोनों नर्सों ने डॉ. रेनुका को फोन किया जो उन्हें फोन पर इंस्ट्रक्शन देती रहीं लेकिन सही तरह से डिलीवरी ना हो पाने के कारण नवजात बच्ची की मौत हो गई। नवजात की मौत के लगभाग आधे घंटे बाद डॉ. रेनुका अस्पताल पहुंची। परिजनों के हंगामा करने पर डॉ. रेनुका ने उन्हें धमकी दी कि अस्पताल का माहौल खराब करने के जुर्म में उन्हें जेल में बंद करवा देंगी। पीड़ित परिवार के पास इस पूरे घटनाक्रम की वीडियो भी है। पीड़ित संदीप सिंह ने आरोप लगाया कि बुधवार को सुबह 12 बजे नर्सों ने उनकी पत्नी को दर्द होने पर गोलियां दें दी। जिसके बाद रात को साढ़े 10 बजे जब दर्द बढ़ा तो वह उसे ऑपरेशन थिएटर ले गए।
संदीप ने बताया कि उनकी पत्नी अंदर दर्द से तड़पती रही और दोनों नर्स बाहर बैठकर रोटी खा रहीं थी। संदीप ने बताया कि जब उनकी मां ने नर्सों को टोका तो उन्होंने जवाब दिया कि डॉक्टर हम हैं या आप। हमें अपना काम करने दो। संदीप सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि केस खराब होने पर दो-तीन नर्स और एक अन्य डॉक्टर डिलिवरी करवाने का प्रयास कर रहे थे। संदीप के मुताबिक उनकी पत्नी की डिलीवरी के वक्त इतनी लापरवाही की गई कि बच्ची की मौत हो गई। संदीप ने बताया कि जब उसने अपनी मृतक बच्ची देखी तो उसके शरीर पर नील के निशान थे और एक तरफ की बाजू पर सूजन थी। उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि खींचातानी करते समय उसकी बच्ची की बोन फ्रैक्चर हो गई हो। पीड़ित परिवार ने बताया कि रात को साढ़े 10 बजे उसकी पत्नी को ऑपरेट के लिए ले जाया गया था परंतु बच्ची की मौत के बारे में संबंधित स्टॉफ ने उन्हें कुछ नहीं बताया। उन्होंने बताया कि बच्ची की मौत के बाद वह सीनियर डॉक्टर रेणुका जिंदल का इंतजार करते रहे और उसके आने पर साढ़े 11 बजे उसकी बच्ची की मौत की जानकारी दी। जब इस बाबत अस्तपाल के एसएमओ विजय कुमार भगत से बात की गई तो उन्होंने ये कहते हुए पल्ला झाड़ने की कोशिश की कि अस्पताल में गायनाकोलॉजिस्ट डॉक्टर की कमी है। उन्होंने कहा अब कैसे इन सभी चीजों को देखा जाए क्योंकि एक डॉक्टर सारा दिन और रात नहीं बैठ सकता। हालांकि, उन्होंने माना की इस पूरे मामले में उस समय सीनियर डॉक्टर मौजूद नहीं था। फिलहाल इस मामले में बोर्ड बनाकर जांच शुरू कर दी गई है।
फोन पर चिकित्सक ने ही करवाया प्रसव, नवजात की हुई मौत,अब जांच शुरू