नई दिल्ली,सर्वोच्च न्यायालय के एक सफल वरिष्ठ वकील की एक दिन की आय 50 लाख रुपए से भी ज्यादा होती है। इस कमाई की तुलना में सर्वोच्च न्यायालय के जज की कमाई बेहद कम है। उनकी एक माह का वेतन बमुश्किल एक लाख रुपए होता है। इसके अलावा उन्हें कुछ भत्ते और आवास की सुविधा के अलावा कुछ अन्य सहूलियतें भी मिलती है।
वकीलों और जजों की आय में भारी अंतर की वजह से ही अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के विदाई समारोह में सर्वोच्च न्यायालय के जजों का वेतन तीन गुना करने की मांग की थी। इस संदर्भ में देश के 46वें चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की संपत्तियों पर यदि नजर डाली जाए तो उनके पास सोने का कोई आभूषण नहीं है। उनकी पत्नी के पास जो सोने के आभूषण हैं, वे शादी के समय परिजनों-रिश्तेदारों, मित्रों से मिले थे।
उनके पास कोई निजी वाहन नहीं है, हालांकि इसका एक बड़ा कारण यह हो सकता है कि करीब दो दशक पहले जब वह जज बने तब से ही उनको आधिकारिक रूप से गाड़ी मुहैया कराई गई है। स्टॉक मार्केट में उनका कोई निवेश नहीं है इसके साथ ही जस्टिस गोगोई पर कोई देनदारी, लोन, ओवरड्रॉफ्ट नहीं है। सन 2012 में जस्टिस रंजन गोगोई ने अपनी संपत्तियां सार्वजनिक की थीं।
जस्टिस गोगोई और पत्नी की एलआईसी पॉलिसी को मिलाकर उनके पास तकरीबन कुछ बैंक बैलेंस है। इस साल जुलाई में उन्होने यह भी घोषित किया कि 1999 में गुवाहाटी हाई कोर्ट का जज बनने से पहले उन्होंने वहां पर एक प्लॉट खरीदा था, उसको इस साल जून में 65 लाख रुपये में किसी को बेच दिया। यह भी घोषित किया कि 2015 में उनकी मां ने जस्टिस गोगोई और पत्नी के नाम गुवाहाटी के पास जपीरोगोग गांव में एक प्लॉट ट्रांसफर किया था।
CJI जस्टिस गोगोई के पास न घर न गाड़ी