मुंबई,कच्चे तेल के दाम चार साल के उच्च स्तर पर पहुंचने, बाजार में नकदी को लेकर चिंता, डालर के मुकाबले रुपये के अब तक के निचले स्तर पर उतरने से एशियाई बाजारों के साथ साथ भारतीय शेयर बाजारों में भी गिरावट का सिलसिला पांचवें दिन भी जारी रहा। बैंक और वाहन कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट के बीच बंबई शेयर बाजार में पिछले सात महीने में किसी एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
सोमवार को सेंसेक्स 537 अंक की गिरावट के साथ ढाई महीने के न्यूनतम स्तर 36,305 अंक पर उतर गया। निफ्टी भी 168 अंक की गिरावट के साथ 10,975 अंक पर बंद हुआ। बीएसई के आंकड़ो के अनुसार यह छह फरवरी के बाद एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है। उस दिन इसमें 561 अंक की गिरावट आयी थी। सेंसेक्स का 11 जुलाई के बाद यह न्यूनतम स्तर है। उस दिन यह 36,266 अंक पर बंद हुआ। कुल मिलाकर पिछले पांच कारोबारी सत्रों में सूचकांक 1,786 अंक टूटा चुका है। इससे निवेशकों को 8.48 लाख करोड़ के बाजार पूंजीकरण का फटका लगा है।
बॉक्स : क्यो नहीं रुक रही बाजार की गिरावट
– कच्चे तेल की बढ़ती कीमत
कच्चे तेल की कीमत में हो रही वृद्धि शेयर बाजार की गिरावट की मुख्य वजह रही है। सोमवार को कच्चे तेल की कीम 1.83 पैसे बढ़कर 80.27 डॉलर प्रति बैरल हो गई थी। इसकी कीमत में उछाल की मुख्य वजह ईरान पर अमेरिका की ओर से लगाई जा रही पाबंदियां हैं। मालूम हो कि, ईरान पर बैन लगाने की तैयारी में अमेरिका ने ओपेक नेशन्स और रूस से तेल के उत्पादन बढ़ाने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने ट्रंप की बात अनसुनी कर दी। इससे कीमत में उछाल आई।
– रुपये में गिरावट
तेल की बढ़ती कीमत का सीधा असर रुपये पर भी पड़ रहा है। यह लगातार डॉलर के मुकाबले कमजोर हो रहा है। बैकों और आयातकों द्वारा डॉलर की खरीदारी के चलते सोमवार को भी यह डॉलर के मुकाबले 43 पैसे कमजोर होकर 72.63 पर खुला।
– नॉन-बैंकिंग फाइनैंस कंपनियों को लेकर शंका
बीते सप्ताह भर भारी गिरावट के बाद डीएचएफएल सोमवार को तो संभाल गया, लेकिन पीएनबी हाउसिंग, कैन फाइनैंस होम्स जैसी नॉन-बैंकिंग फाइनैंस कंपनियों में रही गिरावट का पूरे बाजार के कारोबार पर असर हुआ क्योंकि निवेशकों को लग रहा है कि कई अन्य नॉन-बैंकिंग फाइनैंस कंपनियां अपनी हैसियत बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रही हैं।
– फेडरल रिजर्व की मीटिंग
25 और 26 सितंबर अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की मीटिंग से पहले वैश्विक रेटिंग एजेंसिंयों का मानना है कि ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट्स तक की वृद्धि हो सकती है। उसके बढ़ने से भारत जैसे उभरते बाजारों में लिक्विडिटी की कमी हो सकती है जो पहले से ही अपनी करंसी की कमजोरी से चिंतित हैं।
– विदेशी निवेशकों की निकासी जारी
बीएसई के आंकड़ो के अनुसार विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों जनवरी से अब तक 8,837.92 करोड़ रुपये मूल्य की इक्विटीज बेच चुके हैं। 2017 की इसी अवधि में यह रकम महज 49,729 करोड़ रुपये थी। आर्थिक जानकारों का कहना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा इस सप्ताह ब्याज में 0.25 प्रतिशत वृद्धि की आशंका के बीच विदेशी निवेशकों ने पूंजी की निकासी की।
स्थानीय स्तर पर पिछले सप्ताह आवासीय तथा गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की सेहत को लेकर शुरू हुई चिंता से बाजार में अफरा-तफरी बनी हुई है। सरकार तथा नियामकीय संस्थानों के बयान के बावजूद बाजार कोष लागत बढ़ने तथा गुणवत्ता के साथ नकदी में सख्त स्थिति बनने जैसी चुनातियों को लेकर चिंतित है।
-सरकार और सेबी मिलकर रखेंगे नजर
रिजर्व बैंक और बाजार नियामक सेबी ने रविवार को कहा कि वे वित्तीय क्षेत्र की गतिविधियों पर नजर रखेंगे और जरूरत पड़ने पर उपयुक्त कदम उठाएंगे। वहीं वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कहा कि सरकार गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों और म्यूचुअल फंड के लिये पर्याप्त नकदी सुनिश्चित करने के लिये सभी जरूरी कदम उठाएगी।
ट्रेडवार, तेल की तेजी, रुपए की टूटन से लुढ़के बाजार