बुंदेलखंड पैकेज घोटाले में 65 इंजीनियर दोषी पाए गए,आरोप पत्र जारी

भोपाल,केन्द्र सरकार द्वारा बुंदेलखंड पैकेज के तहत स्वीक्रत पैकेज में जमकर अनियमितता हुई है। इसका खुलासा सरकार की ही एजेंसी मुख्य तकनीकी सतर्कता परीक्षक ने किया है। करीब 100 करोड रुपए की लागत से तैयार हुई नल-जल योजनाएं ज्यादातर जगहों पर फेल हो गई है। इसके लिए पहली नजर हमें 65 इंजीनियर को दोषी ठहराया गया है। इन इंजीनियरों को विभागीय जांच के लिए आरोप पत्र थमाकर जवाब तलब किया है। इसके साथ ही कुछ इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई प्रस्तावित है। सूत्रों की माने तो नलजल योजना के लिए तत्कालीन यूपीए सरकार ने करीब 100 करोड रुपए सौ करोड रुपए मंजूर किए थे। यह जिम्मेदारी प्रदेश के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को सौंपी थी। विभाग ने सर्वे कर सागर, पन्ना टीकमगढ, और छतरपुर में जो विस्तार से डीपीआर प्रस्तुत किया, इसमें गंभीर त्रूटियां थी।
सामग्री की जरुरतों का आंकलन मनमर्जी से किया गया। नलकूपों में जो सबमर्सिबल पंप लगाए वह कम क्षमता के थे। इससे योजना पर खर्च किया गया पैसा बेकार चला गया। इंजीनियरों ने मनमाने ढंग से बिना स्वीक्रति के खर्च किया गया। पहली नजर में दोषी पाए गए सेवानिव्रत्त इंजीनियरों के खिलाफ भी जांच बिठा दी है। पीएचई के अधिकारियों ने बताया कि कुछ और इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव बनाया गया है जो जल्द ही कैबिनेट में रखा जाएगा। सूत्रों की माने तो करीब चार साल पहले मुख्य तकनीकी सतर्कता परीक्षक कार्यालय ने जांच कर रिपोर्ट सामान्य प्रशासन विभाग को सौंपी दी थी। जांच में दोषियों पर कार्रवाई करने में इतना समय लगा दिया कि एमके जैन, जेपी पटेल, आरके सैनी, ओपी चौबे, एचएन मिश्रा, केके द्विवेदी, पीएल चौधरी, एके मोदी, एके असाटी, आरए पांडेय, आरके शर्मा, एम वाल्मिकी जैसे इंजीनियर सेवानिव्रत्त हो गए है। एक उपयंत्री का पिछले साल निधन हो गया।

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