नई दिल्ली,देश के सबसे बड़े कर सुधार के लिए लागू किया गया जीएसटी कानून सरकार के लिए मुफीद साबित हुआ। एक साल में जीएसटी लागू होने के बाद सरकार के टैक्स कलेक्शन में लगभग 400000 करोड़ रुपए की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। 2018-19 मई तक दो लाख करोड़ अतिरिक्त राजस्व मिलने की उम्मीद सरकार को बन गई है। जीएसटी से केंद्र एवं राज्य सरकारें अपने खजाने को भरने में सफल हुए हैं कॉल ब्लॉक की नीलामी में सबसे ज्यादा राजस्व जीएसटी में मिला है।
जीएसटी से पहले उत्पाद कर के रूप में सरकार को 3.83 लाख करोड़ सेवा कर से 2.54 लाख करोड़ तथा 3.46 करोड अन्य आय से प्राप्त होते थे। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों से यह राशि 9.83 लाख करोड रुपए होती थी। 1 जुलाई से जीएसटी लागू होने के बाद 1 जुलाई 2017 से मार्च 2018 तक सरकार को जीएसटी से 7.19 लाख करोड़ इसमें अप्रैल माह में 1.03 लाख करोड़ रुपए मिला दे तो 9 माह में सरकार को जीएसटी से 8.22 लाख करोड़ कर राजस्व के रूप में प्राप्त हुआ है, जो कि पिछले वर्ष की तुलना में ज्यादा है।
व्यापारियों और कर सलाहकारों की मुसीबत
जीएसटी कानून लागू होने के बाद सरकार द्वारा समय-समय पर इस पर बदलाव किए गए 1 साल में 100 से अधिक अधिसूचनाएं जारी की गई कर सलाहकार भी व्यापारियों को रिटर्न जमा करने और टैक्स वसूल करने की प्रक्रिया को नहीं समझा पाए जिसके कारण व्यापारियों को भारी जुर्माना और ब्याज भरना पड़ा। व्यापारी लगातार परेशान होते रहे किंतु सरकार द्वारा उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, जिसके कारण व्यापारियों में जीएसटी लागू होने के बाद सरकार के प्रति लगातार गुस्सा देखने को मिल रहा है।
जीएसटी लागू होने के बाद महंगाई बढ़ी
केंद्र सरकार दावा करती है कि जीएसटी के कारण महंगाई पर नियंत्रण हुआ है किंतु व्यापारियों और आम जनता के अनुसार जीएसटी लागू होने के बाद से कीमतों में भारी वृद्धि हुई है। महंगाई बढ़ी है। लगभग 7 फ़ीसदी वस्तुओं के दाम बढ़ गए हैं, जिन वस्तुओं पर और सेवा कर के रूप में 15 फ़ीसदी अधिकतम टैक्स लगता था अब उसमें जनता को 18 फ़ीसदी और 28 फ़ीसदी टैक्स चुकाना पड़ता है जिस कारण महंगाई बढ़ने से आम जनता परेशान है। अब सभी जगह महंगाई को लेकर सरकार के खिलाफ वातावरण बनने लगा है।
उद्योग धंधे बंद हुए
नोटबंदी और जीएसटी लागू होने के बाद देश में बड़ी संख्या में लघु एवं मध्यम उद्योग बंद हुए। जीएसटी कानून की जानकारी जीएसटी लागू करने वाले अधिकारियों, कर सलाहकारों और आईटी कंपनी के टेक्निकल अधिकारियों व कर्मचारियों को नहीं होने से पूरे 1 साल लड़का सीखे नाव का सिर कटे गवार का यही स्थिति बनी हुई है। जीएसटी लागू होने के बाद से उद्योग धंधे बंद होने से बैंकों का एनपीए बड़ी तेजी के साथ बड़ा है। कई अच्छे भले चलते हुए उद्योग और कारोबार जीएसटी के कारण बंद हुए हैं। यह अलग बात है कि सरकार इस तथ्य को सीधे-सीधे स्वीकार नहीं कर रही है किंतु बैंकों का एनपीए किस बात का उदाहरण है?
इंटरनेट और जीएसटीएन सरवर ने बढ़ाई मुसीबतें
केंद्र सरकार ने जीएसटीएन कानून लागू करते समय देश में इंटरनेट की कनेक्टिविटी को लेकर कोई ठोस इंतजाम नहीं किए जिसके कारण पूरे साल भर व्यापारी और Colors कर सलाहकार परेशान होते रहे। जीएसटी के पोर्टल में जो नियम कानून कायदे और अधिसूचनाएं जारी हुई समय पर सर्वर पर अपडेट नहीं होने से व्यापारी और बड़े बड़े कारोबारी लगातार परेशान हैं। कईयों के व्यापार और उद्योग धंधे केवल इसी गड़बड़ी के कारण बंद हो गए हैं। जीएसटी कानून के कारण कई लोग दिवालिया होने की कगार पर खड़े हैं। बैंक सरफेसी एक्ट और दिवालिया कानून के अंतर्गत कार्यवाही कर रहे हैं लेकिन सरकार इस सत्य को लगातार झूठला रही हैं।
100 से अधिक अधिसूचनाएं
जीएसटी लागू होने के बाद से वित्त मंत्रालय ने 100 से अधिक अधिसूचनाएं जारी किए हैं, जिसके कारण व्यापारी और कर सलाहकार लगातार परेशान होते रहे इ वे बिल और रिटर्न को लेकर भी साल भर लगातार बदलाव का दौर चलता रहा सरकार किसी काम के लिए जिम्मेदार नहीं बनी किंतु व्यापारियों को जरूर जिम्मेदार बनाकर उनसे जुर्माना और ब्याज वसूल करने में कोई कमी नहीं की जिसके कारण कई साधारण व्यापारी अपने कारोबार और उद्योग को हर माह और हर दिन की परेशानी को देखते हुए स्वयं बंद कर रहे हैं। स्वतंत्र भारत के इतिहास में जीएसटी को लेकर 1 साल के अंदर केंद्र ने 100 से अधिक अधिसूचनाएं जारी कर सारे विश्व में एक रिकॉर्ड कायम किया है, इसे आगे चलकर गिनीज बुक अथवा लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स जरूर स्थान मिलेगा।
एक देश और एक कर भी जुमला साबित हुआ
जीएसटी लागू होने के बाद केंद्र एवं राज्य सरकारों ने बड़े बड़े दावे किए थे कि इसके लागू होने के बाद से पूरे देश में एक समान कर लागू होंगे। इससे आम आदमी को राहत मिलेगी। कारोबारियों को भी धंधा करना अब ज्यादा आसान होगा। महंगाई घटेगी और कर चोरी बड़े पैमाने पर रुकेगी, जिसके कारण आयकर का स्लैब भी कम होगा, किंतु 1 साल में जिस तरीके से सरकार ने जीएसटी के साथ सेस जोड़ा पेट्रोल डीजल शराब एवं अन्य उत्पादों को जीएसटी में शामिल नहीं किया राज्य सरकारों ने भी अलग अलग नाम से नए कर लगाना शुरू कर दिए। जीएसटी के साथ-साथ केंद्र एवं राज्यों ने एक समानांतर कर व्यवस्था नए स्वरूप में लागू करके आम जनता और व्यापारियों दोनों को कष्ट में डालने का काम किया है। राज्य सरकारों द्वारा भिन्न भिन्न तरीके से नए करों और नई व्यवस्था को लागू करने के कारण परेशानियां पहले से कई गुना ज्यादा बढ़ गई हैं, जिस कारण महंगाई तेजी के साथ बढ़ रही है वहीं बेरोजगारी भी उद्योग धंदे बंद होने के कारण बढ़ी है। इस कारण पूरे देश में जनता की नाराजगी भी कई रूपों में देखने को मिल रही है।
जीएसटी से सरकार की कमाई और व्यापारियों की मुसीबत बढ़ी