छिंदवाड़ा,जंगलों में कराए जाने वाले कार्यो के लिए मिलने वाले त्रिमासिक बजट में शासन ने 70 फीसदी की कटौती कर दी है। बजट में हुई कटौती ने विभागीय कार्यो को लेकर अधिकारियों को मंथन करने पर मजबूर कर दिया है। वन विभाग में वर्ष 2017- 18 के लिए बनी कार्ययोजना के कार्य अभी अमल तक नहीं पहुंचे है और विभाग के सामने बजट का संकट पैदा हो गया है। ऐसे में विभागीय आलाधिकारियों ने वर्ष 2018- 19 की कार्ययोजना तैयार करने के लिए निर्देश जारी कर दिए है। ऐसे में अधिकारियों को अब यह समझ नहीं आ रहा है कि वह अधूरे कार्य पूर्ण कराए या नए कार्यो के लिए प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करे। गुरूवार को वन विभाग के संवाद सदन में वृत स्तरीय कार्यशाला में इसी विषय को लेकर मंथन का दौर जारी रहा।
पौधे नहीं पनपे तो जिम्मेदार कौन
बजट में कटौती होने से विभाग में अफसरों से लेकर कर्मचारी तक यह तय नहीं कर पा रहे है कि आखिर 30 फीसदी बजट में कार्य कैसे होंगे। एक तरफ तो उनसे 80 फीसदी पौधरोपण जीवित मांगा जाता है यदि सुरक्षा और देखरेख के आभाव में यदि पौधे मरते है तो उसके लिए जिम्मेदारी किसकी होगी।
गुणवत्ता हीन न हो पत्ता
बैठक में कम हुए बजट के अलावा अधिकारियों ने तेंदुपत्ता संग्रहण पर भी चर्चा की। फिलहाल बात यह सामने आई है कि मौसम की बेरूखी से फिलहाल पत्ता तैयार नहीं हो सका है ऐसे में 12 मार्च के आसपास से संग्रहण कार्य शुरू कराया जाए। अधिकारियों का कहना था कि इस बार ऐसा पत्ता न तोडा जाए तो गुणवत्ता हीन हो।
30 फीसदी कम मिला बजट जो जरूरी है अब उसी की तैयार होगी प्रोजेक्ट रिपोर्ट