शीर्ष न्यायपालिका की आजादी से समझौता हो चुका है- अरुण शौरी

नई दिल्ली,पूर्व केंद्रीय मंत्री और पत्रकार अरुण शौरी ने कहा है कि भारत की शीर्ष न्यायपालिका की आजादी दांव पर नहीं है,बल्कि इससे समझौता किया जा चुका है। एक न्यूज चैनल से उन्होंने कहा कि जिस तरह से पिछले एक साल में बेंच फिक्स किए गए हैं, उससे लगता कि उन्होंने कार्यपालिका को खुश करने के लिए ऐसा किया है। उन्होंने कहा,आजकल सुप्रीम कोर्ट से जुड़े मसले समाचार जगत में अभूतपूर्व जगह पा रहे हैं और न्यायपालिका की तरफ से कई चीजें पहली बार हो रही हैं। कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष द्वारा चीफ जस्ट‍िस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग लाया गया, जिस खारिज कर दिया गया। उन्होंने कहा कि इसके पहले सुप्रीम कोर्ट के चार शीर्ष जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर शीर्ष न्यायपालिका के हालात पर असंतोष जाहिर किया था। इसके बाद उत्तराखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्ट‍िस के एम जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट में जज बनाने के मामले में ड्रामा चल रहा है। उन्होंने कहा कि ‘सब कुछ ठीक नहीं है और ऐसी चीजें हो रही हैं, जिन्हें नहीं होना चाहिए।
अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में विनिवेश मंत्री रह चुके शौरी ने इस दौरान कई मसलों पर खुलकर अपनी राय रखी। क्या सुप्रीम कोर्ट के चार जजों को अपनी शिकायतें न्यायपालिका के सिस्टम के भीतर ही करना चाहिए था और सार्वजनि‍क रूप से सामने नहीं आना चाहिए था, इस सवाल पर शौरी ने कहा कि इन जजों ने जो कुछ किया वह ‘गांधीवादी तरीका’ था, जिसमें उन्होंने ‘गलत बात असहनीय होने पर’ अपने को अभिव्यक्त किया। उन्होंने अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए सभी औपचारिक तरीके अपना लिए थे और आखिर में प्रेस कॉन्फ्रेंस जैसे सार्वजनिक मंच का सहारा लिया। इसके बाद सवाल में उप-राष्ट्रपति वेंकैया नायडू द्वारा सीजेआई दीपक मिश्रा के महाभियोग प्रस्ताव को खारिज करने की शौरी ने आलोचना की। उन्होंने कहा कि महाभियोग प्रस्ताव को खारिज करने का उप-राष्ट्रपति के पास अधिकार नहीं है,वह सिर्फ इसकी जांच कर सकते थे कि इस पर पर्याप्त सदस्यों के दस्तखत हैं या नहीं और महाभियोग को पुष्ट करने के लिए जो साक्ष्य दिए गए हैं वे व्यवहार्य हैं या नहीं। अरुण शौरी ने कहा कि राजनीतिक कार्यपालिका असल में न्यायपालिका को जमीन पर लाकर धौंस जमाने की कोशिश करेगी। कार्यपालिका की तो यह कोशिश रही है कि हमेशा न्यायपालिका को ‘याचक’ बनाए रखें। शौरी ने कहा कि अधिनायकवादी मानसिकता के लोग न्यायपालिका को पूरी आजादी के साथ काम करने नहीं देते और इसके प्रति पूरे देश को सचेत रहना होगा।

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