मोदी सरकार से समर्थन वापस लेंगे चंद्रबाबू,दोनों मंत्री देंगे केंद्र से इस्तीफा!

नई दिल्ली,राजग को लगने वाला है एक और बड़ा झटका। चंद्रबाबू नायडू की तेलुगूदेशम पार्टी राजग का दामन छोड़ने वाली है और जल्द ही पार्टी के दो केंद्रीय मंत्री अशोक गजपति राजू तथा वाईएस चौधरी इस्तीफा दे सकते हैं। इसके साथ ही सोनिया गांधी की ओर से दिए जाने वाले रात्रिभोज में भी तेदेपा के सांसद भाग ले सकते हैं। तेदेपा और कांग्रेस की नजदीकी के संकेत तब मिले, जब संसद परिसर में तेदेपा सांसद आंध्रप्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे, तब कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी उनके साथ आ गई थीं। यही नहीं, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि उनकी पार्टी यदि सत्ता में आई, तो आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देगी। उधर, विजयवाड़ा में पार्टी विधायकों की बैठक में 125 विधायक और 34 विधान परिषद सदस्य मौजूद थे, जिसमें अधिकांश ने भाजपा के साथ गठबंधन तोड़ने का आग्रह चंद्रबाबू नायडू से किया। नायडू पहले भी राजग को चेतावनी दे चुके हैं कि यदि राज्य विभाजन के समय आंध्र प्रदेश के साथ किए गए वादे पूरे नहीं किए गए तो वह भाजपा का साथ छोड़ देंगे। अब माना जा रहा है कि चंद्रबाबू नायडू राजग सरकार से समर्थन वापस लेंगे और 10 मार्च को तेदेपा कोटे से मोदी सरकार में मंत्री अशोक गजपति राजू और वाईएस चौधरी इस्तीफा दे देंगे। बता
दें कि तेदेपा सांसद पिछले तीन दिनों से संसद में लगातार हंगामा कर रहे हैं और वित्त मंत्री अरुण जेटली की तेदेपा सांसदों के साथ हुई बैठक का भी कोई नतीजा नहीं निकल सका है। भाजपा ने तेदेपा की अवांछित मांगों को मानने से साफ इंकार कर दिया है। पार्टी का कहना है कि हमने आंध्र प्रदेश के विकास के लिए हरसंभव प्रयास किया है और राज्य सरकार को पूरी मदद दी है। लेकिन यदि पिछड़ेपन की वजह से किसी राज्य को विशेष राज्य का दर्जा दिया जाएगा तो आंध्र से पहले बिहार का नाम आता है। अब सोनिया गांधी ने 13 मार्च को विपक्षी नेताओं को रात्रिभोज पर बुलाया है, ताकि मोदी सरकार को विभिन्न मोर्चों पर घेरा जा सके। इस भोज में शामिल होने का न्योता तेदेपा को भी दिया गया है और सूत्रों के मुताबिक रात्रि भोज में तेदेपा की ओर से दो सांसद भेजे जा सकते हैं। गौरतलब है कि तेदेपा पूर्व में भी राजग सरकार का हिस्सा रह चुकी है। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान तेदेपा राजग का हिस्सा थी और तब भी ऐन चुनावों के पहले गुजरात दंगों के नाम पर तेदेपा ने राजग का साथ छोड़ दिया था।

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