NRC में नाम नहीं हुआ तो नहीं माना जाएगा देश का नागरिक : सोनेवाल

गुवाहाटी,असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनेवाल ने कहा कि राज्य सरकार उनकी उन लोगो को कोई संवैधानिक अधिकार नहीं देगी जिनके नाम नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (एनआरसी) की अंतिम सूची में दर्ज नहीं होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे मानवीय आधार पर उन लोगों को तब तक भारत में रहने की इजाजत देंगे, जब तक केंद्र सरकार उनके निष्कासन पर कोई फैसला नहीं लेती है। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा तय किया गया मानवीय अधिकार ही मिलेगा, जिसके तहत उन्हें कुछ समय तक रहने के लिए जगह, खाना और कपड़े मुहैया कराए जाएंगे। एनआरसी का पहला ड्राफ्ट जारी करने के 48 घंटे बाद सीएम सोनेवाल का यह बयान आया है। बता दें कि रविवार करीब रात 11:45 पर एनआरसी ने 3.29 करोड़ आवेदनों में से 1.9 करोड़ लोगों की सूची जारी की थी। एनआरसी की यह प्रक्रिया इस साल के आखिर तक पूरी हो सकती है। सन 2016 में मुख्यमंत्री बनने के बाद सोनेवाल के शुरुआती फैसलों में गुवाहटी में एनआरसी का दफ्तर बनाने का भी था।
मुख्यमंत्री ने कहा जिन लोगों का नाम एनआरसी की अंतिम सूची में नहीं होगा उन्हें संवैधानिक अधिकारों के अलावा मूलभूत अधिकार और चुनाव का अधिकार भी नहीं दिया जाएगा। उन्हें संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा तय किया गया मानवीय अधिकार ही मिलेगा, जिसके तहत उन्हें कुछ समय तक रहने के लिए जगह, खाना और कपड़े मुहैया कराए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि एनआरसी के ऐतिहासिक ड्राफ्ट के बाद भारतीयों और विदेशी नागरिकों में अंतर हो पाएगा। उन्होंने कहा, ‘एनआरसी के पहले ड्राफ्ट में कुल आवेदनों के करीब 40 प्रतिशत नाम हैं। दूसरे ड्राफ्ट के लिए छंटनी जल्द शुरू होगी। इस फेज के पूरा हो के बाद जिन लोगों के नाम एनआरसी में नहीं होंगे, उन्हें अपने दावे के लिए न्यायिक प्रक्रिया का सहारा लेना पड़ेगा। उन्हें एनआरसी के हिसाब से तय किए गए दस्तावेज दिखाने होंगे।’
भारत और बांग्लादेश के बीच कोई भी निर्वासन संधि नहीं होने की बात पर उन्होंने कहा, ‘निर्वासन का मामला बाद में आता है। हमारा पहला उद्देश्य विदेशी नागरिकों की पहचान करना है। बाद में हम क्या कार्रवाई करेंगे, इसका फैसला बाद में होग।’ उन्होंने कहा कि एनआरसी के बाद राज्य के लोगों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल जाएगी। सीएम सोनेवाल ने कहा, ‘करीब 40 साल से हमारे लोग भ्रम और अस्थिरता का जीवन जी रहे हैं। एनआरसी के बाद यह खत्म हो जाएगा। यह पूरे राज्य के लोगों के लिए जीत साबित होगी। कोई किसी की नागरिकता पर सवाल नहीं उठाएगा।’

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