यह साल अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी में भारत के लिए अहम् होगा,हॉकी में रहेगी और अच्छे की उम्मीद

नईदिल्ली,अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी में भारत को और भी बेहतर प्रदर्शन की उम्मीदें हैं। भारत के पास कई विश्व स्तर के मुक्केबाज हैं जिन्होंने लगातार अच्छा खेल दिखाया है। बीते साल में भारतीय मुककेबाजों ने कई सफलताएं हासिल की थी। अधिकांश टूर्नामेंटों में भारतीय खिलाड़ियों को पदक मिले हैं। प्रमुख मुक्केबाजों गौरव बिधूड़ी और एमसी मेरी कॉम से लेकर शिव थापा तक सभी ने पदक जीते थे। वहीं अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी में भी भारत का दबदबा बढ़ा है और उसे 2006 के बाद पहली बार विश्व चैंपियनशिप ( 2018 महिला और 2021 पुरुष) की मेजबानी मिली है। भारत में पहली युवा विश्व चैंपियनशिप का आयोजन किया गया और एक सफल मेजबान के रूप में भारत ने अपनी धाक जमाई। गुवाहाटी में हुई चैंपियनशिप में भारत ने सात स्वर्ण पदक भी जीते। ऐसे में नये साल में विश्व स्तर पर भारत मुक्केबाजी में पदकों का एक बड़ा दावेदार बनकर उभरा है।
भारतीय मुक्केबाजी में बदलाव का दौर तभी शुरु हो गया जब महिला, पुरुष और जूनियर मुक्केबाजों के लिए विदेशी कोचों की नियुक्ति की गई। यूरोपीय कोचों के आयोग के उपाध्यक्ष सैंटियागो नीवा पुरुष टीम के और फ्रांस के स्टीफाने कोटालोरडा महिला टीम के कोच बने। वहीं इटली के रफेले बर्गामास्को जूनियर टीम के कोच नियुक्त किये गए।
इसके अलावा ताशकंद में एशियाई चैंपियनशिप में शिवा थापा ( 60 किलो ) पदकों की हैट्रिक लगाने वाले पहले भारतीय मुक्केबाज बने। उन्होंने 2013 में स्वर्ण, इस सत्र में रजत और 2015 में कांस्य पदक जीता था। भारत ने कुल मिलाकर चार पदक जीते और उजबेकिस्तान तथा कजाखस्तान के बाद तीसरा स्थान हासिल किया। गौरव बिधूड़ी 56 किलो बड़े स्तर पर पदार्पण के साथ पदक जीतने वाले दूसरे भारतीय मुक्केबाज बन गए।यह भारत का अब तक का चौथा कांस्य पदक था। उन्होंने सभी को हैरान कर दिया, क्योंकि गौरव मूल टीम का हिस्सा भी नहीं थे। एशियाई मुक्केबाजी परिसंघ से मिले वाइल्ड कार्ड पर वह खेले थे। वहीं वियतनाम में एशियाई चैंपियनशिप में पांच बार की विश्व चैंपियन एमसी मेरी कॉम ने पांचवां स्वर्ण पदक अपने नाम किया। भारत ने इस टूर्नामेंट में एक रजत और पांच कांस्य पदक भी जीते।
हॉकी के लिए अहम है नया साल
नया साल हॉकी के लिए काफी अहम है। इससे पहले साल 2017 भारतीय हॉकी के लिए ठीक ठाक रहा। इसमें भारतीय हॉकी टीम ने सफलता तो हासिल की लेकिन साथ ही कुछ टूर्नामेंटों में उसे निराशा का भी सामना करना पड़ा। इस वर्ष दो स्वर्ण और तीन कांस्य पदक भारत के नाम रहे परन्तु बड़े टूर्नामेंटों की सफल मेजबानी से अंतरराष्ट्रीय हॉकी में भारत का दबदबा बढ़ा। भारतीय सीनियर पुरूष टीम ने गत वर्ष एशिया कप में स्वर्ण जीता जबकि अजलन शाह कप और भुवनेश्वर में हुए हॉकी विश्व लीग फाइनल में उसे कांस्य से ही संतोष करना पड़ा।
भारतीय हॉकी टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह ने कहा, “यह साल टीम के लिए मिलाजुला रहा। कई टूर्नामेंट में टीम का प्रदर्शन अच्छा रहा लेकिन हॉकी विश्व लीग के सेमीफाइनल में टीम ने खराब खेला हालांकि कुल मिलाकर देखा जाए तो टीम ने हॉकी विश्व लीग के फाइनल में कांस्य पदक जीत कर साल का समापन किया। अगले साल हम अपनी प्रदर्शन को बेहतर करने की कोशिश करेंगे।”2018 में भारतीय टीम को राष्ट्रमंडल खेल, एशियन खेल और विश्व कप जैसे अहम टूर्नामेंट खेलने हैं। मनप्रीत ने कहा, “यह साल हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण है, खासकर एशियन खेल जो कि विश्व कप क्वालीफायर भी है।

 

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