विदर्भ पहली ख‍िताबी जीत की ओर, 233 रनों की बढ़त लेकर दिल्ली को मुश्किल में डाला

इन्दौर,इन्दौर में दिल्ली और विदर्भ के बीच खेले जा रहे रणजी ट्रॉफी फाइनल के तीसरे दिन विदर्भ ने दिल्ली को मुश्क‍िल में डालकर अपनी पहली खिताबी जीत की ओर कदम बढ़ा लिए हैं। होलकर की ‘स्पोर्टिंग विकेट’ पर रविवार का दिन पूरी तरह से विदर्भ के नाम रहा। वसीम जाफर (78) व आदित्य सरवटे (79) के अर्द्धशतकों के बाद अक्षय वाडकर (133*) व सिद्धेश नरेल (56*) की नाबाद पारियों की बदौलत विदर्भ ने तीसरे दिन खेल खत्म होने तक दिल्ली के 295 रनों के जवाब में अपनी पहली पारी में 7 विकेट खोकर 528 रन बनाकर 233 रनों की मजबूत बढ़त लेकर अपनी जीत सुनिश्च‍ित कर ली है। क्योंकि इतनी लम्बी बढ़त को पाटकर दिल्ली की मैच में वापसी नामुमकिन लगती है।
होलकर स्टेडियम में खेले जा रहे इस पॉंच दिवसीय मुकाबले के तीसरे दिन रविवार को सुबह विदर्भ ने 4 विकेट पर 206 रन से आगे खेलना शुरु किया। वसीम जाफर और अक्षय वाखरे ने विदर्भ की पारी को आगे बढ़ाया। सैनी के 74वें ओवर में वाखरे ने लगातार तीन गेंदों पर तीन चौके लगाए लेकिन आखिरी गेंद पर वह विकेटकीपर-कप्तान पंत के दस्तानों में जा बैठे। वाखरे ने 17 रनों का योगदान दिया। नवदीप सैनी ने 77वें ओवर की पांचवां गेंद पर वसीम जाफर को पगबाधा कर विदर्भ को बड़ा झटका देकर मैच में दिल्ली की वापसी की उम्मीद जगा दी। जाफर ने 78 रनों की अर्द्धशतकीय पारी खेली, यह उनके प्रथम श्रेणी का 86वॉं अर्द्धशतक था। 246 रनों पर 6 विकेट गंवाने के बाद विदर्भ की टीम पर संकट मंडराने लगा था, लेकिन इसके बाद ऑलराउंडर अक्षय वाडकर ने आदित्य सरवटे के साथ सातवें विकेट के लिए 169 रन की साझेदारी कर टीम को न केवल इस संकटे से निकाला बल्कि पहली पारी के आधार पर टीम को निर्णायक बढ़त भी दिला दी। इस बीच वाडकर ने मिड ऑन क्षेत्ररक्षक के ऊपर से चौका जड़कर अपना शतक जैसे ही पूरा किया, स्टैंड में मौजूदा उनके परिवार के सदस्यों ने भी उनकी हौसला-अफजाई की। 168 गेंदों में वाडकर के बल्ले से निकला यह शतक उनके प्रथम श्रेणी कॅरियर का पहला शतक है। चायकाल के कुछ देर पहले 415 के स्कोर पर आदित्य सरवटे 79 रन बनाकर नितीश राणा की गेंद पर विकेट के पीछे ऋषभ पंत के हाथों लपक लिए गये। इसके बाद वाडकर का साथ देने आए सिद्धेश नरेल ने तीसरे दिन खेल समाप्त‍ि तक विदर्भ के विकेट बचाए रखे और 8वें विकेट के लिए 113 रनों की नाबाद साझेदारी कर विदर्भ को 500 के पार लगाया। तीसरे दिन खेल समाप्त‍ि तक वाडकर 244 गेंदों में 16 चौकों व 1 छक्के की मदद से 133 रन और नरेल 92 गेंदों में 4 चौके व 4 छकके जमाकर क्रीज़ पर मौजूद थे। तीसरे दिन विदर्भ के बल्लेबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए न केवल दिल्ली के गेंदबाजों को विकेट के लिए तरसा दिया, बल्कि महज 3 विकेट गंवाकर 322 रन जोड़ कर अपनी टीम को 528 कें बड़ा करने में अहम भूमिका निभाई।
:: लंच तक विदर्भ ने 41 रनों की बढ़त बना ली थीं ::
उस वक्त 98 ओवर के खेल में विदर्भ ने 6 विकेट पर 336 रन बनाकर दिल्ली के विरूद्ध 41 रनों की बढ़त बना ली थी। उस वक्त सरवटे 72 गेंदों में 50 रन और वाडकर 64 गेंदों में 39 रन बनाकर खेल रहे थे। लंच के बाद दिल्ली के गेंदबाज थके-थके नज़र आने लगे थे।
:: लंच के बाद मैदान पर नज़र नहीं आए गंभीर ::
अनुभवी गौतम गंभीर भी क्षेत्ररक्षण के दौरान अंगुली में चोट के कारण लंच के बाद क्षेत्ररक्षण के लिए मैदान पर नज़र नहीं आए। उन्होंने विकास मिश्रा की गेंद पर सरवटे का कैच ड्राप किया। किस्मत ने नरेल का अच्छा साथ दिया और वह खजरोलिया की गेंद पर दो बार आउट हुए, लेकिन दोनों बार नोबॉल हो गई।
:: चायकाल तक बढ़त बढ़कर 149 रनों की हो गयी ::
लंच के बाद स्कोर के साथ-साथ विदर्भ की बढ़त भी बढ़ती जा रही थी। चायकाल तक यह बढ़त बढ़कर 149 रनों की हो गई थी। उस वक्त 134 ओवर के खेल के बाद 7 विकेट खोकर विदर्भ ने 444 रन बना लिए थे। वाडकर 172 गेंदों में 100 रन बनाकर खेल रहे थे, जबकि सिद्धेश नरेल 28 गेंदों में 9 रन बनाकर विदर्भ के लिए पहला ख‍िताब जीतने की राह आसान बना रहे थे।
:: थके-थके नज़र आ रहे थे दिल्ली के गेंदबाज ::
वसीम जाफर के आउट होने तक नवदीप सैनी काफी थक चुके थे, जिससे उन्हें विदर्भ के पुछल्ले बल्लेबाजों को अधिक गेंदबाजी करने का मौका नहीं मिला। उनके गेंदबाजी से हटने से वाडकर और सरवटे को विकेट पर जमने का मौका मिला, दोनों ने विदर्भ के स्कोर को मजबूती प्रदान की। मनन शर्मा लंबे समय तक मैदान से बाहर रहने से स्प‍िनरों के मजबूत विकल्प की कमी दिल्ली को खली। ध्रुव शौरी (10-1-27-0), विकास मिश्रा (38-6-102-0) व नितेश राणा (13.1-1-32-1) से दिल्ली को कोई खास मदद नहीं मिली, वहीं तेज गेंदबाज नवदीप सैनी (32.5-4-126-1) और कुलवंत खजरोलिया (35-5-122-1) की जोड़ी को काफी गेंदबाजी करनी पड़ी। आकाश सूदन (27-3-102-2) तीसरे दिन अपना जलवा नहीं दिखा सकें।

 

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