भोपाल, ज्योतिष मठ और शारदा पीठम के शंकराचार्य स्वामी स्वरुपानंद सरस्वती ने शिव सरकार द्वारा बहुप्रचारित एकात्म यात्रा पर सवाल उठाये हैं,उन्होंने सरकार पर झूठी जानकारी देने और दुष्प्रचार करने की बात भी कही है. एकात्म यात्रा पर आपत्ति जताते हुए इसके आयोजकों को उन्होंने शास्त्रार्थ की चुनौती दी है। शंकराचार्य का कहना है कि आदि शंकराचार्य के जन्म के बारे में जो जानकारी सरकार द्वारा प्रचारित की जा रही है ,वह सर्वथा गलत है। उन्होंने कहा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को नरसिंहपुर स्थित नर्मदा किनारे सांकल घाट में वह गुफा भी दिखलाई थी। जिसमें आदि शंकराचार्य का सन्यास हुआ था। सांकल घाट में आदि शंकराचार्य ने अपने गुरु गोविंद भगवत्पाद से दीक्षा ग्रहण की थी। शंकराचार्य ने कहा नरसिंहपुर जिले में नर्मदा नदी के उत्तर तट, सांकल घाट में आदि शंकराचार्य जी के सन्यास दीक्षा का उल्लेख नरसिंहपुर के गजेटियर में भी है। उन्होंने कहा की नर्मदा के सांकल घाट पर मध्य प्रदेश के दो गौरव हैं। एक, यहां पर आदि शंकराचार्य की सन्यास दीक्षा हुई है। दूसरा, स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की यह जन्मस्थली भी है, जो वर्तमान में 2 पीठों के शंकराचार्य हैं।
सांकल घाट में स्थापित करें मूर्ति
उन्होंने कहा कि आदि शंकराचार्य की मूर्ति यदि लगना थी, तो वह सांकल घाट में लगनी चाहिए थी, न कि ओंकारेश्वर में।उन्होंने कहा मध्य प्रदेश सरकार के प्रयास तब सराहनीय हो सकते थे, जब वह तथ्यों की अनदेखी नहीं करते। मध्य प्रदेश सरकार आदि शंकराचार्य का जन्म 650 ईसवी के बाद का बता रही है। यह भी कह रही है कि उन्होंने ओंकारेश्वर में सन्यास धारण किया था, जो सर्वथा गलत है। यह प्रमाणिक तथ्यों से छेड़छाड़ करने का मामला है। शंकराचार्य जी ने कहा ब्रिटिश लेखक जिन्होंने इतिहास के साथ छेड़छाड़ की है। मध्य प्रदेश सरकार उसको सत्य मान रही है। वस्तुस्थिति यह है कि न्यायालय ने भी राजा सुधन्वा का ताम्र लेख प्रमाणिक माना है। आदि शंकराचार्य का आविर्भाव काल युधिष्ठिर संवत 2663 माना गया है, जो ईसा पूर्व 478 वर्ष होगा। स्वामी स्वरूपानंद ने कहा द्वारका, शारदा पीठ,पुरी शंकराचार्य पीठ एवं काची की आचार्य परंपरा जो ईसा पूर्व से ही निरंतर चली आ रही है। उसकी अनदेखी कैसे की जा सकती है। शास्त्रों में इसके प्रमाण मौजूद हैं।
शंकराचार्य जी ने ईएमएस से चर्चा करते हुए कहा, मध्य प्रदेश सरकार अपनी मूर्खता, अज्ञानता का स्थाई स्तंभ ओंकारेश्वर में बनाने जा रही है। यह ऐसा हो रहा है ,जैसे इतिहास में तुगलकी फरमान के बारे में कहा जाता है। शंकराचार्य ने कहा आदि गुरु शंकराचार्य ने संपूर्ण भारत का भ्रमण कर चारों दिशाओं में चार मठ स्थापित किए थे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह सही मायने में आदि गुरु शंकराचार्य जी की एकात्म यात्रा से प्रभावित थे, तो उन्हें अमरकंटक से ओंकारेश्वर तक की एकात्मक यात्रा निकालने के स्थान पर आदि शंकराचार्य की जन्म स्थली से लेकर केदारनाथ तक की यात्रा निकालनी चाहिए थी। स्वरूपानंद जी ने कहा की एकात्मक यात्रा को आदि शंकराचार्य की जन्म स्थली कोच्चि से लेकर केदारनाथ तक ले जाने से इस यात्रा का महत्व होता।
मोदी की बात झुठला रहे शिवराज
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद ने यह भी कहा कि विगत दिनों भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केदारनाथ की यात्रा पर गए थे। वहां उन्होंने स्वयं ढाई हजार वर्ष पूर्व आदि शंकराचार्य के होने की बात कही थी, जबकि मध्य प्रदेश सरकार अपने ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तथ्यों को झुठला रही है।
ओंकारेश्वर में शंकराचार्य का जिक्र नहीं
स्वरूपानंद ने कहा ओंकारेश्वर हमारे यहां का एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थान है द्वादश ज्योतिर्लिंग में अन्यतम अमलेश्वर यहां पूजित होते हैं। यहां शंकराचार्य जी का सन्यास स्थल होता, तो इसका उल्लेख शास्त्रों में और ओंकारेश्वर में भी होता। इस प्रसिद्ध स्थान का उल्लेख कहीं पर भी उपलब्ध नहीं है। आदि शंकराचार्य यदि ओंकारेश्वर कभी गए होते, तो उसका उल्लेख शंकराचार्य चारित्र्य में होता,जो कहीं पर भी देखने में नहीं मिलता है। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी का कहना है एकात्म यात्रा यदि आदि शंकराचार्य को ध्यान में रखकर शुरू की जा रही है तो इसका शुभारंभ उनके जन्म स्थली से शुरू होकर चारों पीठ के दर्शन करते हुए इसे केदारनाथ ले जाना चाहिए था। उन्होंने कहा मध्य प्रदेश सरकार आदि शंकराचार्य और एकात्मक यात्रा के माध्यम से राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति करने में वास्तविकता से परे जाकर शास्त्रों और वास्तविकताओं को झुठलाने का काम कर रही है। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी ने एकात्म यात्रा पर सवाल खड़े करते हुए कहा की मुख्यमंत्री चाहे तो वह स्वयं तथ्यों के बारे में जानकारी प्राप्त करें। उन्होंने कहा एकात्म यात्रा के माध्यम से जो झूठ फैलाया जा रहा है। वही स्वीकार्य नहीं है।
शिव सरकार की एकात्म यात्रा को शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने शास्त्रार्थ की चुनौती दी,सरकार पर लगाया झूठी जानकारी देने का आरोप