गुजरात में भाजपा-कांग्रेस में सीधा मुकाबला

अहमदाबाद,गुजरात विधानसभा के प्रथम चरण के चुनाव के नामांकन पत्र भरे जा चुके है। चुनाव प्रचार अपने चरम सीमा पर पहुंच गया है। कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी का प्रथम चरण का चुनाव प्रचार पूरा हो गया है। भाजपा ने भी चुनाव प्रचार में पूरी ताकत लगा दी है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने गुजरात चुनाव प्रचार की बागडोर संभाल रखी है। पाटीदार और दलित आंदोलन और विरोध को देखते हुए, भाजपा ने कांग्रेस को कमजोर करने के बाघेला का जनविकल्प मोर्चा बनवा दिया था। किन्तु इस तोड्फोड् से भाजपा को कोई लाभ होता नहीं दिख रहा है। कांग्रेस और भाजपा के टिकट वितरण से नाराज होकर भी नेता जन विकल्प मोर्चा की टिकट लेने तैयार नहीं है।
– जद-एनसीपी की खास उपस्थिति नहीं
जनता दल और एनसीपी ने गुजरात चुनाव में भारी भागदौड् की। किन्तु इस पार्टियों के टिकट लेने के लिए कहीं माहौल नहीं बना। केसी त्यागी जदयू से लगातार प्रयास करते रहे।
भाजपा से उन्होंने 12सीट मांगी थी। उन्हें एक भी नहीं मिली। बडी मुश्किल से 11 उम्मीदवार जदयू का झंडा उठाने तैयार हुए है।
एनसीपी का भी लगभग यही हाल है 2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव में हार्दिक पटेल, जिग्नेश और — से भाजपा को जो चुनौती मिल रही है। उससे गुजरात विधानसभा का चुनाव भाजपा-कांग्रेस के बीच केंद्रित होकर रह गया है। इस बदले हुए माहौल में सबसे ज्यादा आश्चर्य भाजपा को हो रहा है।
– भाजपा ने उतारे वोट कटवा
भाजपा ने इस स्थिति से निपटने के लिए जातिय आधार पर वोट कटवा उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतार दिए है। इन्हें आर्थिक संसाधन उपलब्ध कराकर जातीय आधार पर वोट कबाड्ने के लिए तैयार किया जा रहा है। बोट कटवा उम्मीदवार कितने वोट काट पाएगें, इसमें संदेह है। भाजपा ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र से एक दर्जन उम्मीदवार तक चुनाव मैदान में उतारे है। भाजपा से नाराज वोट किसी भी हालत में कांग्रेस में ना जा पाये। इसका प्रयास भाजपा कर रही है।
– हार्दिक-जिग्नेश- अल्पेश का जादू
गुजरात चुनाव में मुख्य आकर्षक हार्दिक पटेल, जिग्नेश, अल्पेश बने हुए है। विरोध का नेतृत्व इन्हीं के आसपास केंद्रित हो गया है। प्रथम चरण के चुनाव प्रचार में तमाम प्रयासों के बाद भी इन तीनों युवा नेताओं का आकर्षण बना हुआ है। भाजपा ने इनके बीच भारी तोड्फोड् कराई। हार्दिक की दो सीडी भी उजागर हुई। किन्तु इसके बाद भी इन युवाओं का आकर्षण कम नहीं हुआ। वरन सीडी से भाजपा को नुकसान होता दिख रहा है।
– भाजपा को चुनावी प्रबंधन पर भरोसा
भाजपा को अपने चुनावी प्रबंधन पर भरोसा है। प्रत्येक बूथ की जिम्मेदारी 30 मजबूत कार्यकर्ताओं को सौपीं गई है। भाजपा के बूथ लेबिल चुनावी प्रबंधन का जबाब कांग्रेस के पास नहीं है। भाजपा गुजरात विधानसभा के चुनाव को पूरी शिद्धत से लड् रही है। जिसके कारण मतदाताओं का मानना है कि सरकार तो भाजपा की बनेगी। कांग्रेस की सीट जरुर बढ् सकती है।
– बूथ प्रबंधन नहीं होने से कांग्रेस को नुकसान
गुजरात विधानसभा के चुनाव में भाजपा के मुकाबले कांग्रेस का प्रबंधन बहुत कमजोर है। मतदान के पूर्व कांग्रेस के बूथ इंचार्ज तथा विधानसभा में मतदान कराने के मामले में कांग्रेस हमेशा फिसड्डी साबित होती है। इसका फायदा भाजपा को हमेशा मिलता है। इस चुनाव में भी मिलेगा। क्योंकि भाजपा ने कांग्रेस के हर प्रबंधन को तोड्ने के लिए रणनीति बना रखी है।

– प्रथम एवं द्वितीय चरण के मतदान पूर्व तुरुप का पत्ता खोलेगी भाजपा

गुजरात विधानसभा का चुनाव जीतने के लिए भाजपा ने साम-दाम-दण्ड भेद की नीति बना रखी है। कांग्रेस ने चुनाव प्रचार के प्रथम चरण में खूब सुर्खियां बटोरी है। परिवर्तन की हवा भी दिख रही है। चुनाव विशेषज्ञों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह मतदान के पूर्व जब अपने तुरुप के पत्ते चलेगे। उसका मुकाबला करना कांग्रेस के बश में नहीं होगा।
– कांग्रेस का बढा हुआ आत्म् विश्वास
कांग्रेस नेताओं का मानना है कि 10 से 15 फीसदी उसका वोट बढ्ना तय है। मोदी के विरोध में लहर चल रही है। युवा नाराज है जिसके कारण राहुल का आत्म् विश्वास बढा हुआ है। कांग्रेस नेता 102 से लेकर 115 सीटों पर विजय का दावा कर रहे हैं। वहीं चुनावीं विशेषज्ञों का मानना है कि मतदान के पूर्व भाजपा कुछ ऐसी चल चलेगी और मतदान के पूर्व बूथ लेबिल पर जो प्रबंधन करेगी। उसका मुकाबला कर पाना कांग्रेस के लिए संभव नहीं होगा। भाजपा इस चुनाव में पिछले चुनावों की तुलना में ज्यादा आक्रमक है।

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