नई दिल्ली,पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने गुरुवार को कहा कि यदि देश का बंटाधार हो रहा हो तो कोई भी सोचने वाला व्यक्ति चुप नहीं रह सकता। सिन्हा ने कहा कि देश की जीडीपी लगातार गिर रही है, इसे सरकार भी नकार नहीं सकती।
एक समाचार चैनल से सिन्हा ने नोटबंदी के बाद भी यूपी चुनाव में बीजेपी की जीत को लेकर कहा, ‘यदि कोई चुनाव जीत जाता है तो उसकी सारी गड़बड़ियां नहीं भूल सकते। चुनाव जीतना एक बात है और देश चलाना दूसरी बात है। पीएम भी कहते हैं कि दल से ऊपर देश है और मुझे लगेगा कि देश के बारे में कुछ बोलना है तो मैं दल से ऊपर उठकर बोलूंगा।’
सिन्हा ने जीएसटी लागू कराने को लेकर पीएम मोदी और बीजेपी के दावों पर सवाल खड़े करते हुए कहा, ‘जीएसटी को आगे बढ़ाने में मैंने बड़ी भूमिका निभाई। जब मैं वित्त मामलों की समिति का अध्यक्ष था तो प्रणब मुखर्जी ने बिल पेश किया था। तब गुजरात के वित्त मंत्री सौरभ पटेल ने इसका विरोध किया था। इसके बाद भी हमने अपनी रिपोर्ट में जीएसटी लागू करने की सिफारिश की थी। मैंने लगातार जीएसटी के समर्थन में बोला है। मैं बदला नहीं हूं, जो लोग बदले हैं और सबसे बड़ा बदलाव करार दे रहे हैं, उनसे पूछना चाहिए।’
सिन्हा वित्त मंत्री पर निशाना साधने को लेकर कहा, ‘मैंने अरुण जेटली को हटाने के लिए नहीं कहा है, लेकिन 40 महीनों से वह वित्त मंत्री हैं तो सवाल तो उनसे ही पूछे जाएंगे। उनके वित्त मंत्री रहते हुए सोना गिरवी रखे जाने को लेकर पूछे गए सवाल को लेकर उन्होंने कहा कि इसके फायदे हुए और आप देख सकते हैं कि देश को इससे क्या फायदा हुआ।’ सिन्हा ने कहा कि यदि देश की आर्थिक रफ्तार कम होती है तो इससे गरीबी बढ़ेगी। ऐसे में हम कह सकते हैं कि देश गरीबी की ओर जा रहा है। खुद के वित्त मंत्री रहते हुए महंगाई जैसे मुद्दों पर घिरने को लेकर सिन्हा ने कहा कि यदि मैंने गलत किया था तो 2004 में उसके नतीजे भुगत चुका हूं। तब मैं निजी तौर पर अपनी सीट हार गया था।
उन्होंने कहा कि 2014 में मैंने खुद चुनाव न लड़ने का फैसला किया था, इस बारे में राजनाथ सिंह से आप पूछ सकते हैं। मेरा फैसला था कि मुझे चुनावी राजनीति और फिर धीरे-धीरे राजनीति से ही हटना है। देश का बंटाधार होगा तो कोई भी सोचने वाला आदमी चुप नहीं रह सकता। मैं 2014 में ही चुनावी राजनीति से संन्यास ले चुका हूं, लेकिन देश का मुद्दा आएगा तो मैं बोलूंगा।
यशवंत सिन्हा ने कहा कि यदि मोदी सरकार मेरे सुझावों पर अमल करती है तो 2019 में वापसी होगी। बेटे के सरकार में होने और सरकार की आलोचना को लेकर सिन्हा ने कहा कि बेटे और पिता का रिश्ता सरकारी नहीं होता है। सार्वजनिक जीवन में हम दोनों स्वतंत्र व्यक्तित्व हैं। सिन्हा ने कहा, ‘बेटे के सरकार में और राजनीति में आने के बाद हमारे बीच कोई बातचीत नहीं हुई है।’
देश का बंटाधार हो रहा हो तो कोई भी चुप नहीं रह सकता-सिन्हा