8 आतंकियों के जेल ब्रेक और एनकाउंटर मामले में पुलिस को मिली क्लीनचिट

भोपाल, भोपाल सेंट्रल जेल से सिमी के 8 आतंकियों के भागने और फिर एनकाउंटर में उनके मारे जाने के मामले में पुलिस को क्लीनचिट मिल गई है| जस्टिस एसके पाण्डे ने 9 माह बाद सरकार को ज्यूडिशियल इन्क्वायरी की रिपोर्ट सौंपी है । इसका खुलासा प्रदेश के एक अंग्रेजी दैनिक ने अपने अखबार में किया है । हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस एसके पांडे ने 9 माह बाद प्रभांशु कमल एडिशनल चीफ सेक्रेटरी जनरल एडमिनिस्ट्रेशन को 12 पेज की ज्यूडिशियल इन्क्वायरी की रिपोर्ट के साथ सैकड़ों पेज के एनेक्सचर सौंपे हैं। रिपोर्ट में जेल और पुलिस विभाग को मर्ज करने की भी सिफारिश की गई है, जिससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। हालाकिं जिम्मेदार अधिकारियों ने इस रिपोर्ट को गोपनीय होने का हवाला देते हुए इस पर अधिकृत रूप से कुछ भी बोलने से इंकार किया है। उनका कहना है कि दिसंबर 2017 में प्रस्तावित विधानसभा के मानसुन सत्र में सरकार इस रिपोर्ट को सदन के पटल पर रखेगी। इसके बाद ही इसे सार्वजनिक किया जाएगा। रिपोट मे ज्यूडिशियल इन्क्वायरी ने हालात और परिस्थिति का हवाला देते हुए जेल ब्रेक करके भागे 8 सिमी आतंकियों के एनकांउटर को सही ठहराया है। सूत्रों का कहना है कि कमीशन ने ग्रामिणों के बयान के आधार पर अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि यदि सिमी आतंकियों को पुलिस ने मनीखेड़ी गांव के आसपास घेरकर उन्हें सरेंडर करने को कहा था, लेकिन आतंकियों ने पुलिस पर गोलीबारी करना शुरू कर दी। जवाबी गोलीबारी में 8 आतंकी मारे गए। सूत्र ने बताया कि रिपोर्ट के अनुसार कि 8 आतंकी जेल प्रहरी रमाशंकर की हत्या करने के बाद चादर की रस्सी बनाकर बाउंड्रीवाल फांद कर भागे थे। उल्लेखनीय है कि पुलिस एनकांउटर पर प्रश्नचिन्ह लगने के बाद चीफ मिनिस्टर शिवराज सिंह चौहान ने 7 नवंबर 2016 को जस्टिस पांडे की अध्यक्षता में 3 माह के लिए सिंगल मेंबर की ज्यूडिशियल इन्क्वारी गठित की थी। इसका समय 9 माह तक बढ़ाया गया। सूत्रों ने यह भी बताया कि कमीशन ने भोपाल जेल में क्षमता से दोगुने कैदी बंद होने के संबंध में जेल प्रबंधन व्दारा लिखे गए पत्रों को गंभीरता से न लेना भी लापरवाही बताया है। कमीशन ने यह भी कहा है कि कैदियों पर नजर रखने के लिए जेल में 42 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, लेकिन इसमें सिमी के आतंकियों की निगरानी के लिए लगे चारों सीसीटी कैमरे खराब पाए गए, जो कि घटना से डेढ़ महिने पहले से बंद थे। इतना ही नहीं 30-31 अक्टूबर 2016 की दरम्यानी रात को भोपाल सेंट्रल जेल में 70 की बजाए सिर्फ40 स्टाफ ड्यूटी पर थे, इनमें से भी कई लोग दीपावली मना रहे थे। ये बात जेल के ज्यादातर कैदियों को पता थी।
इन बिन्दुओं पर की जांच
– जेल से भागे 8 आतंकी किन हालात एवं घटनाक्रम में जेल से फरार हुए। उक्त घटना के लिए कौन-कौन अधिकारी-कर्मचारी जिम्मेदार हैं।
– मनीखेड़ा गांव में 8 आंतकियों के एनकांउटर किन परिस्थिति एवं घटनाक्रम में हुआ।
– पुलिस व्दारा किए एनकांउटर की कार्यवाही उन हालातों में उचित थी कि नहीं।
– जेल ब्रेक जैसी घटना वापस न हो इसके संबंध मेंभी आयोग से सुझाव मांगे गए हैं।

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