पटना, बिहार में जदयू और भाजपा गठबंधन की सरकार बनने के बाद प्रदेश कांग्रेस में खलबली मची हुई है। बागी नेताओं के सुर केंद्रीय नेतृत्व के खिलाफ और मुखर होते जा रहे हैं। इसी क्रम में नया नाम है कांग्रेस एमएलसी दिलीप कुमार चौधरी का। जिन्होंने कांग्रेस आलाकमान पर दोषारोपण करते हुए कहा है कि आने वाले दिनों में अगर बिहार कांग्रेस में टूट होती है तो इसके लिए केंद्रीय नेतृत्व जिम्मेदार होगा।
दिलीप कुमार चौधरी ने बताया प्रदेश कांग्रेस में इस वक्त असमंजस की स्थिति है। केंद्रीय नेतृत्व इसको लेकर संजीदा नहीं है और उसकी तरफ से कोई दिशा-निर्देश भी जारी नहीं किया जा रहा है। गौरतलब है कि पिछले कुछ वक्त से इस बात की चर्चा है कि प्रदेश कांग्रेस में टूट हो सकती है और 18 से ज्यादा विधायक पार्टी छोड़कर जेडीयू में शामिल हो सकते हैं। इसी आशंका के बीच दो हफ्ते पहले कांग्रेस के कई विधायकों ने दिल्ली में पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की थी और उन्हें बिहार कांग्रेस पर मचे बवाल से अवगत कराया था। राहुल गांधी के साथ मुलाकात में पार्टी के कई विधायकों ने इस बात को लेकर दबाव बनाया कि कांग्रेस को बिहार में राजद के साथ गठबंधन खत्म करना चाहिए और नए सिरे से पार्टी को मजबूत करने की कोशिश करनी चाहिए। जिससे 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस अपने दम पर चुनाव लड़ सके।
एमएलसी दिलीप कुमार चौधरी से पहले भागलपुर से कांग्रेस विधायक अजीत कुमार शर्मा ने भी कांग्रेस आलाकमान के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कहा था कि पिछले 20 सालों से राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की पार्टी से गठबंधन करने से कांग्रेस को नुकसान ही हुआ है। इसी वजह से कांग्रेस बिहार में हाशिए पर चली गई है। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस के ज्यादातर असंतुष्ट विधायकों की सोच यही है कि कांग्रेस छोड़कर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू में शामिल हो जाएं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चौधरी को भी कांग्रेस आलाकमान जिस तरीके से हटाना चाहता है, इसको लेकर भी दिलीप कुमार चौधरी और अजित शर्मा ने नाराजगी जाहिर की है। अगर अशोक चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाया जाता है, तो नए प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर अखिलेश सिंह सबसे प्रबल दावेदार हैं।
बिहार कांग्रेस में तेज हुए बगावत के सुर, पार्टी में टूट लगभग तय