वायु सेना के एकमात्र मार्शल अर्जन सिंह का निधन

नई दिल्ली, भारतीय वायु सेना में सर्वोच्च रैंक मार्शल हासिल करने वाले अर्जन सिंह का शनिवार की शाम निधन हो गया। वे 98 वर्ष के थे और उन्हें सुबह ही दिल्ली के आर्मी रिसर्च एंड रेफरल हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था। वायु सेना ने शनिवार को ट्वीट के द्वारा यह जानकारी दी है। अर्जन सिंह के स्वास्थ्य की जानकारी मिलते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण उनसे मिलने अस्पताल पहुंचे थे। उनके निधन से देश में शोक की लहर आ गई है। प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति सहित तमाम बड़े नेताओं और सेना से जुड़े पदाधिकारियों ने शोक व्यक्त किया है।
मार्शल अर्जन को जब वायु सेना प्रमुख बनाया गया था, तब उनकी उम्र महज 44 साल थी। आजादी के बाद पहली लड़ाई में भारतीय वायुसेना की कमान भी उन्हीं ने संभाली थी। उन्हें चीन के साथ 1962 की लड़ाई के बाद 1963 में उन्हें वायु सेना उप-प्रमुख बनाया गया था।
पांच सितारा रैंक वाले अधिकारी
पद्म विभूषण से सम्मानित अर्जन सेना के पांच सितारा रैंक अधिकारी थे। देश में पांच स्टार वाले तीन सैन्य अधिकारी रहे हैं। इनमें फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ और फील्ड मार्शल केएम करियप्पा का नाम भी शामिल है। अब ये तीनों ही जीवित नहीं हैं। ये तीनों ही ऐसे सेनानी रहे, जो कभी सेना से रिटायर नहीं हुए।
19 साल में पायलट ट्रेनिंग
मार्शल अर्जन का जन्म 15 अप्रैल, 1919 को लायलपुर (अब पाकिस्तान के फैसलाबाद में) में हुआ। अर्जन 19 वर्ष की उम्र में पायलट ट्रेनिंग कोर्स के लिए चुने गए थे। अर्जन ने आजादी के दिन 15 अगस्त, 1947 को वायु सेना के 100 से भी अधिक विमानों के लाल किले के ऊपर से फ्लाइ-पास्ट का भी नेतृत्व किया था।
मार्शल अर्जन सिंह से जुड़ी खास बातें
– अर्जन सिंह मार्शल रैंक पर प्रमोट होने वाले भारतीय वायुसेना के अब तक के इतिहास में इकलौते अधिकारी हैं।
– मार्शल अर्जन सिंह 1 अगस्त, 1964 से 15 जुलाई, 1969 तक भारतीय वायुसेना के प्रमुख रहे।
– पाकिस्तान के साथ 1965 की जंग में उनके नेतृत्व में भारतीय वायुसेना के अभूतपूर्व प्रदर्शन के बाद उन्हें एयर चीफ मार्शल पद पर प्रमोट किया गया।
– मार्शल अर्जन सिंह लगातार पांच साल तक इंडियन एयरफोर्स प्रमुख के पद पर रहने वाले एकमात्र अधिकारी हैं।
– द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उन्होंने बर्मा (म्यांमार) में पायलट और कमांडर के तौर पर अदम्य साहस और वीरता का प्रदर्शन किया।
– अप्रैल, 2016 में मार्शल अर्जन सिंह के 97वें जन्मदिन के मौके पर तत्कालीन एयरफोर्स चीफ अरुप राहा ने पश्चिम बंगाल स्थित पनागढ़ एयरफोर्स बेस का नाम उनके नाम पर रखा था।
– 1971 में मार्शल अर्जन सिंह को स्विट्जरलैंड में भारत का राजदूत नियुक्त किया गया। इसके अलावा उन्होंने वेटिकन सिटी और केन्या में भी देश के लिए अपनी सेवाएं दीं।
– अर्जन सिंह ने 1944 में इम्फाल अभियान में स्क्वाड्रन लीडर के तौर पर अपनी टीम का नेतृत्व किया।
– अपने पूरे करियर में मार्शल अर्जन सिंह ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौर के लड़ाकू विमानों के साथ 60 अलग-अलग तरह के विमानों को उड़ाया। उन्होंने नैट और वैम्पायर विमानों के साथ-साथ सुपर ट्रांस्पोर्टर विमानों के साथ भी उड़ान भरी।
– 27 जुलाई, 2015 को पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के निधन के बाद जब उनका पार्थिव शरीर दिल्ली एयरपोर्ट पर लाया गया था तो अर्जन सिंह व्हीलचेयर पर पहुंचे थे और खड़े होकर सैल्यूट करते हुए श्रद्धांजलि भी दी थी।

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