पुणे,सोना-चांदी और लाखों का कैश चोरी जाने की खबर बहुत सुनी और पढ़ी जाती हैं लेकिन पुणे स्थित नेशनल फिल्म आरकाइव ऑफ इंडिया(एनएफएआई) से 92 हजार फिल्म प्रिंट के गायब होने का मामला सामने आया है। इसके बाद यह मामला मीडिया में सुर्खियों में आ गया है। 92 गायब प्रिंट में से ख्यात भारतीय फिल्मकारों की फिल्मों के साथ विदेशी फिल्में भी शामिल थीं। बात दे कि 2010 में नेशनल फिल्म आरकाइव ऑफ इंडिया ने पुणे की एक फर्म को अपनी सभी रील पर बारकोड लगाने की जिम्मेदारी दी थी। इस फर्म ने पाया कि हजारों रील्स ऑन रिकॉर्ड तो मौजूद हैं,लेकिन ये वास्तविकता में मौजूद ये कहीं नहीं हैं। बारकोड लगाने वाली फर्म ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि फिल्म रील्स के 51,500 डिब्बे और 92000 प्रिंट गायब हैं। जबकि एनएफएआई अपने यहां 113 लाख फिल्म रील्स होने का दावा करता है। 4922 डिब्बों में 1112 फिल्म टाइटल मौजूद हैं,जो एनएफएआई के रजिस्टर में दर्ज नहीं हैं, लेकिन आरकाइव के रिकोर्ड में मौजूद हैं।
अग्रेंजी अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, एनएफएआई में लगी एक आरटीआई के जरिए पता चला है कि गायब होने वाले सेल्यूलॉइड प्रिंट्स में सत्यजीत रे (पाथेर पंचाली) ,महबूब खान (मदर इंडिया),राज कपूर (मेरा नाम जोकर,आवारा),मृणाल सेन (भुवन शोम),गुरुदत्त(कागज के फूल) सहित कई फिल्मकारों की फिल्मों की प्रिंट शामिल हैं। भारतीय फिल्मकारों के अलावा कई इंटरनेशनल फिल्मों के प्रिंट भी गायब हैं। इनमें बैटलशिप पोटेमकिन, बाइसकिल थीफ, सेवन समुराय (अकीरा कुरोसावा निर्देशित), नाइफ इन द वाटर आदि शामिल हैं। सौ से ज्यादा मूक फिल्में भी गायब हैं। इतना ही नहीं, आजादी के पहले के कुछ फुटेज भी आरकाइव में मौजूद नहीं हैं।
राज कपूर से लेकर कुरोसावा तक की फिल्मों के 9200 प्रिंट हुए गायब