नई दिल्ली,पहली बार निजी क्षेत्र के सहयोग से आठवें नौवहन उपग्रह के प्रक्षेपण के भारत के प्रयासों को उस समय झटका लगा, जब ध्रुवीय रॉकेट से सटीक उड़ान भरने के बावजूद तकनीकी गड़बडियों के चलते यह मिशन विफल हो गया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष किरन कुमार ने कहा आईआरएनएसएस-1एच से हीट शील्ड अलग नहीं हो पाया।
उन्होंने बताया कि हीट शील्ड आम तौर उडा़न भरने के तीन मिनट के बाद स्वत: अलग हो जाती है। लेकिन यह मिशन के निर्धारित 19 मिनट होने के बाद भी जब अलग नहीं हुई, तो इसरो के वैज्ञानिक चिंता में पड़ गए। वैज्ञानिकों ने बताया कि ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान-पीएसएलवी-सी39 के चौथे चरण में प्रक्षेपण मिशन असफल हो गया। उन्होंने कहा प्रक्षेपण यान के सभी तंत्रों ने शानदार तरीके से काम किया, लेकिन एक जगह चूक हो गई। हीट शील्ड अलग नहीं हो पाया, जिसकी वजह से यह महत्वाकांक्षी मिशन असफल हो गया है। उपग्रह के संयोजन और प्रक्षेपण में पहली बार निजी क्षेत्र को शामिल किया गया था।
इससे पहले प्रक्षेपण में निजी क्षेत्र की भूमिका केवल उपकरणों की आपूर्ति तक ही सीमित थी। पीएसएलवी यान इससे पहले 24 साल पहले एक मात्र विफल उड़ान के बाद से लगातार 39 बार सफल प्रक्षेपण करा चुका है। गुरुवार को पीएसएलवी प्रक्षेपण इस साल का तीसरा प्रक्षेपण था और रॉकेट के उड़ान भरकर चौथे चरण में पहुंचने तक सबकुछ सामान्य लग रहा था, जहां इसे उपग्रह को कक्षा में स्थापित करना था। इसके बाद पैदा हुई गड़बड़ी ने मिशन को असफल कर दिया। मिशन डायरेक्टर के हीट शील्ड के अलग नहीं होने की घोषणा करने के बाद किरन कुमार ने आधिकारिक तौर पर मिशन के असफल होने की घोषणा की।
हीट शील्ड अलग नहीं होने से PSLV-39 प्रक्षेपण मिशन असफल