नई दिल्ली/पटना, बिहार में महागठबंधन टूटने की कगार पर है। भारतीय जनता पार्टी की सफल कूटनीति में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने ही बिछाये जाल में बुरी तरह फंस चुके हैं। नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद यादव को कमजोर करने के लिए भाजपा का जो सहारा लिया था। उसका असर अब उन पर भी पडऩे लगा है।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री ने उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को मंत्रिमंडल से हटाने की जिद अपनी साफ सुथरी छवि को आधार बनाकर पकड़ ली है। भाजपा उनकी इसी कमजोर नस को दबा रही है। मंत्रिमंडल से हटाना या रखना मुख्यमंत्री का संवैधानिक अधिकार है। तेजस्वी के हटते ही राजद सरकार से समर्थन वापस ले लेगी। भाजपा बाहर से समर्थन देकर सरकार को सहारा देगी। नीतिश मुख्यमंत्री भी बने रहेंगे। किन्तु उन पर भाजपा का दबाव बढ़ेगा। जो लालू यादव से कई गुना ज्यादा होगा।
जद-यू के लगभग दो दर्जन विधायकों द्वारा भाजपा से समर्थन लेने पर अलग गुट बनाने की खबरें मिल रही हैं। यह विधायक भाजपा से सहयोग लेने के खिलाफ हैं। ऐसी स्थिति में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समर्थन होते हुए भी काफी कमजोर होंगे। जद यू के दो दर्जन विधायक भाजपा से समर्थन लेने का विरोध कर रहे हैं। बिहार की राजनीति में होने वाले इस बदलाव से देश में विपक्षी गठबंधन आर-पार की लड़ाई लडऩे का शंखनाद लालू की रैली में करेंगे।
देश में मजबूत होगा महागठबंधन
लालू के रूप में विपक्ष को भी एक योद्धा मिल गया है। महागबंधन बिहार में जरूर टूट सकता है। किन्तु महागठबंधन सारे देश में विपक्षी एवं क्षेत्रीय दलों के कारण इसके बाद देश भर में मजबूत होगा। इसका प्रमुख कारण भारतीय जनता पार्टी ने सभी राज्यों में विपक्षी दलों को तोडऩे एवं सांप्रदायिक आधार पर वैमनस्यता फैलाकर अपना जनाधार बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है, जिसके कारण गैर भाजपा दल एकजुट हो रहे हैं। संसद के मानसून सत्र में विपक्षी एकजुटता के कारण सरकार को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
सोनिया ने की सुलह की कोशिश
कांग्रेस नेतृत्व से मिल सकते हैं नीतीश
महागठबंधन में जारी तनातनी के बीच कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सुलह की कोशिशों के तहत नीतीश कुमार और लालू प्रसाद से बातचीत की है। जानकारी के अनुसार, सोनिया ने दोनों नेताओं से संसद के आगामी सत्र और उपराष्ट्रपति चुनाव में साथ रहने की अपील की है।
इन सबके बीच सूत्रों के मुताबिक बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अगले सप्ताह कांग्रेस नेतृत्व से मुलाकात कर सकते हैं। बिहार के सत्तारूढ़ महागठबंधन में जदयू-राजद के अलावा कांग्रेस एक अहम घटक दल है। नीतीश अगले सप्ताह दिल्ली आ रहे हैं। यदि कांग्रेस नेतृत्व उनको आमंत्रित करता है तो वह उनसे निश्चित रूप से मुलाकात करेंगे। 23 जुलाई को दिल्ली में जदयू राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक भी होने जा रही है।
अल्टीमेटम के बाद पहली बार बोले लालू, इस्तीफा नहीं देंगे तेजस्वी
राजद सुप्रीमो ने लालू प्रसाद यादव ने बेटे के इस्तीफे की मांग पर पहली बार बयान दिया है। उन्होंने नाम लिए बगैर नीतीश कुमार पर निशाना साधा और कहा कि तेजस्वी के इस्तीफे की मांग कर रही भाजपा और उसकी तरह की मानसिकता वाले लोगों पर हम कोई अहसान नहीं करेंगे। मतलब साफ है कि आरजेडी किसी कीमत पर तेजस्वी का इस्तीफा नहीं चाहती।
12 मंत्री भी छोड़ेंगे पद
महागंठबंधन में दो फाड़ की चर्चा के बीच बिहान कैबिनेट के एक दर्जन मंत्री भी तेजस्वी के समर्थन में उतर आए है। जानकारी के अनुसार, इन मंत्रियों ने स्पष्ट कहा है कि यदि तेजस्वी को इस्तीफा देना पड़ा तो वे अपना पद छोड़ देंगे। ऐसे में राज्य मेें सरकार पर संकट आ जाएगा। वहीं कुछ राजनीतिज्ञ इसे सरकार के मुखिया पर दबाव के रूप में भी देख रहे हैं।
महागठबंधन टूटने पर जद-यू दो फाड़ की कगार पर