अबू सलेम मुंबई ब्लास्ट का दोषी,सोमवार से शुरू होगी सजा पर सुनवाई

मुंबई,करीब चौदह साल पहले 12 मार्च, 1993 को मुंबई में सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। जिसके लिए विशेष टाडा अदालत ने शुक्रवार को अपना फैसला सुनाते हुए अबू सलेम को मुख्य साजिश कर्त्ता ठहराया है। अदालत ने सलेम के साथ ही मुस्तफा और मोहम्मद दोसा, फिरोज राशिद खान, करीमुल्ला शेख, ताहिर मर्चेंट को भी इस ब्लास्ट का दोषी बताया है। यह फैसला जस्टिस जी.एस. सानप की बेंच द्वारा सुनाया गया है। इसमें गैंगस्टर अबू सलेम को साजिश में शामिल होने का आरोपी माना गया है। कोर्ट ने एक आरोपी अब्दुल कय्यूम को बरी कर दिया है। अब सोमवार से दोषियों की सजा पर सुनवाई शुरू होगी।इस दिन सजा पर बहस के लिए तारीख तय की जाएगी।
ये हैं दोषी
दोषियों में सलेम के साथ मुस्तफा,मोहम्मद दोसा (दोसा बंधु), ताहिर मर्चेंट, अब्दुल कय्यूम, करीमुल्ला शेख और फिरोज राशिद खान शामिल हैं। गौरतलब है मुस्तफा दोसा को साल 2004 में यूएई से गिरफ्तार किया गया था।  हालांकि, सभी आरोपियों को देश के खिलाफ जंग छेड़ने के आरोप से मुक्त कर दिया गया। अबू सलेम को भी टाडा की कुछ धाराओं में बरी किया गया है। रियाज सिद्दीकी को टाडा और अन्य धाराओं में दोषी करार दिया गया है। हालांकि,अदालत ने माना कि उसके खिलाफ अभियोजन पक्ष साजिश का आरोप साबित करने में असफल रहा। अबू सलेम को साजिश, आतंकी गतिविधि समेत कई धाराओं में दोषी करार दिया गया है। सलेम पर आरोप है कि उसने बम कांड को अंजाम देने के लिए हथियारों का जखीरा रिसीव करके ठिकानों तक पहुंचाया। डोसा पर हत्या , विस्फोटक अधिनियम, आपराधिक साजिश, आतंकी गतिविधि के मामले साबित हुए हैं। डोसा को दाऊद का नजदीकी माना जाता है। उसका भाई मोहम्मद डोसा फिलहाल फरार चल रहा है। फिरोज खान को साजिश, मर्डर की धाराओं के अलावा एक्सप्लोसिव ऐक्ट में दोषी करार दिया गया है।
धमाकों के मामलों में अदालत ने आरोपियों के दूसरे बैच पर यह फैसला दिया। इससे पहले, धमाकों के केस में शुरुआती 123 आरोपियों का ट्रायल 2006 में खत्म हुआ था, जिसमें 100 को सजा सुनाई गई थी। सजा पाने वालों में अभिनेता संजय दत्त भी शामिल थे। अबू सलेम ने माना था कि उसने संजय दत्त को हथियार दिए थे। 24 साल पहले 12 मार्च 1993 को मुंबई 12 सिलसिलेवार धमाकों से दहल उठी थी। इसमें 257 लोग मारे गए थे, जबकि 713 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। सीबीआई के मुताबिक, मुंबई धमाके 6 दिसंबर 1992 को हुए बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद हुए दंगों का बदला लेने के लिए किए गए थे। सीबीआई ने अदालत को यह भी बताया कि ये धमाके दुनिया का पहला ऐसा आतंकी हमला था, जहां दूसरे विश्वयुद्ध के बाद इतने बड़े पैमाने पर आरडीएक्स का इस्तेमाल किया गया। शुक्रवार को अदालत ने जो फैसला सुनवाया, उस मामले की 2011 में सुनवाई शुरू हुई थी। पूरी सुनवाई इस साल मार्च में खत्म हुई थी। धमाकों के मामले में यह फैसला आखिरी है क्योंकि अब कोई भी आरोपी पुलिस हिरासत में नहीं है। फरार घोषित 33 आरोपियों में मुख्य साजिशकर्ता दाऊद इब्राहिम, उसका भाई अनीस इब्राहिम, मुस्तफा डोसा का भाई मोहम्मद डोसा और टाइगर मेमन शामिल हैं। सलेम को नवंबर 2005 में पुर्तगाल से प्रत्यर्पण करके भारत लाया गया था। उसके इकबालिया बयान के आधार पर ही सिद्दीकी और शेख को गिरफ्तार किया गया था।

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